गरीब मीलों पैदल चलता है भोजन पाने के लिए,अमीर मीलों चलता है उसे पचाने के लिए...कविता
ग्राम-बटई, पोस्ट-रेवटी, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से दुर्गेश पटेल एक कविता सुना रहे हैं :
किसी के पास खाने के लिए-
एक वक्त की रोटी नही-
किसी के पास एक रोटी खाने के लिए वक्त नही-
कोई अपनों के लिए, अपनी रोटी छोड़ देता हैं-
कोई रोटी के लिए अपनों को छोड़ देता है-
दौलत बचाने के लिए सेहत खो देता हैं...
