फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना...कविता
ग्राम-सिंगपुर, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से प्राथमिक विद्यालय की छात्रा श्वेता मरकाम एक कविता सुना रही हैं:
फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना-
तरु की झुकी डालियों से नित सीखो शीश झुकाना-
सीख हवा के झोंकों से लो कोमल भाव बहाना-
दूध तथा पानी से सीखो मिलना और मिलाना-
सूरज की किरणों से सीखो जगना और जगाना-
लता और पेड़ों से सीखो सबको गले लगाना-
मछली से सीखो स्वदेश के लिए तड़पकर मरना-
पतझड़ के पेड़ों से सीखो दुख में धीरज धरना...
Posted on: Sep 01, 2018. Tags: CG KABIRDHAM POEM SHVETA MARKAM SONG VICTIMS REGISTER
नि वायने गोटुल तमो ले निय वायने गोटुल रो गोटुल तमो ले...गोंडी विवाह गीत
ग्राम-तोडरुर, विकासखंड-कोयलीबेड़ा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़ ) से कविता कोरचे अपनी सहेलियों के साथ गोंडी भाषा में शादी गीत सुना रहे हैं यह गीत जब लड़का और लड़की को गोटुल के मंडप में नाचते हुए ले जाया जाता है तब गाते हैं:
रे रे रे ला रे रे रे रेला रे रे लयों रे रे रेला रे रे रे रेला-
नि वायने गोटुल तमो ले निय वायने गोटुल रो गोटुल तमो ले-
सिलुड़े पलुड घुती ये सिलुड़े पलुड घुती ये घुती तमो ले-
गोटुल इमो किकी तमो ले गोटुल इमो किकी रो किकी तमो रे-
सिलुड़े पलुड घुती ये सिलुड़े पलुड घुती ये घुती तमो ले-
गोटुल खुदेम आन्दी तमो ले गोटुल खुदेम आन्दी रो आन्दी तमो ले-
सिलुड़े पलुड घुती ये सिलुड़े पलुड घुती ये घुती तमो ले ...
Posted on: Aug 31, 2018. Tags: CG GONDI KANKER KOELIBEDA MARRIAGE SAPNA WATTI SONG
गोटुल में मिलकर हम समस्या निपटाते थे, पारम्परिक नेताओं की मदद से उसको पुनर्जीवित करना है...
ग्राम पचायत-पाड़ेंगा, ब्लॉक-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से मोहन यादव के साथ रैनुराम सलाम गोटुल के बारे में बता रहे है: पहले गोटुल की प्रथा थी पूरे गावं के लोगों के लिए एक मंच था गावं में जो भी समस्या होती थी वहां गाँव के सभी लोग उस गोटुल में बैठ कर समस्या का समधान करते थे | लेकिन आज पहले जैसे गोटुल नहीं रहे, गोटुल का पहले जैसा संस्कृति रीति रिवाज की जो प्रथा थी वो धीरे-धीरे लुप्त होते जा रही है आज हमे लगता है हम पढ़े लिखे हो गये हैं. जरूरत है कि हम अपनी मूल संस्कृति को गोटुल में बैठ कर चर्चा करे, जिससे हमारी भाषा संस्कृति की सुरक्षा बनी रहे | इसलिए अभी गाँव के पारम्परिक नेता जैसे पटेल, गुनिया, मांझी ये सभी मिल कर अभी गोटुल प्रथा को बचाने का प्रयास कर रहे हैं...
Posted on: Aug 31, 2018. Tags: CG GOTUL KANKER KOELIBEDA MOHAN YADAV SONG VICTIMS REGISTER
दादा हीरा मरकाम एक मूठी चावल महा कल्याण...गोंडवाना गीत
ग्राम-कटरा, ब्लाक-मरवाही, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से पतराज मरकाम एक गोंडवाना गीत सुना रहे है:
दादा हीरा मरकाम एक मूठी चावल महा कल्याण-
सेवा-सेवा जय बड़ादेवा सेवा-सेवा-
लेवा गोंडवाना रतन के नाम-
10 करोड़ 35 लाखे राजनादगांवे-
जमा है अन्य बचत बैंक के नावे-
एक-एक मूठी मा यही गोंडवाना-
गोंडवाना राजे मा बन बो धन वाना-
समाज बरे करी कुछ गिर मिल के काम-
हमर बैंक हमर पैसा बड़ादेव के नाम...
Posted on: Aug 31, 2018. Tags: BILASPUR CG GONDWANA PATRAJ MARKAM SONG VICTIMS REGISTER
हमारे गाँव का नाम ताडवैली कैसे पड़ा: एक गाँव की कहानी ( गोंडी भाषा में )
सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा आज ग्राम पंचायत-ताडवैली, ब्लॉक-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां मोहन यादव की मुलाक़ात गाँव के बुज़ुर्ग कन्ना राम वड्डे से हुई है जो उन्हें गोंडी भाषा में उनके ताडवैली गाँव के नाम की कहानी बता रहे हैं कि उनके गाँव का यह नाम कैसे पड़ा: वे बता रहे हैं ये गाँव राजा समय का गाव है परालकोट परगना में एक राजा रहते थे- राजा की मदद से यहाँ पर बड़ा सा तालाब बना जिसे गोंडी में तड़ाई
कहते हैं फिर उसके बाद इसलिए इस गाँव का नाम ताडवैली पड़ा- इसी प्रकार यहां के पेड़ पौधो- व्यक्ति या जानवर आदि पर गाँवों के नाम रखे गए हैं जिनके बारे में गाँव के बुज़ुर्ग ही जानते हैं


