खुसे रे गबरू मीना के वासे...गोंडी गीत-
ग्राम-मेटागुडा, तहसील-कोंटा, जिला-सुकमा (छत्तीसगढ़) से छोटू वट्टी एक गोंडी गीत सुना रहे हैं:
खुसे रे गबरू मीना के वासे-
ऐसे या मासा मिलो नो वासे-
मेता ताड इंडा डाड़े मीना के वासे-
रे रे लईयो रेला रेला-
रे रे लईयो रेला रे रेला...
Posted on: Jan 22, 2020. Tags: CG GONDI KUNJAM BHIMA SONG SUKAMA
हे राम हे राम जग में सचो तेरो नाम...भजन
ग्राम-जबलपुर, जिला रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से दीनानाथ पटेल एक भजन सुना रहे हैं:
हे राम हे राम जग में सचो तेरो नाम-
तू ही माता पिता है इस जग के सारे काम-
तू ही बिगाड़े तू ही संवारे तेरे चरणों में चारो धाम-
हे राम हे राम जग में सचो तेरो नाम-
हे राम हे राम जग में सचो तेरो नाम-
तू ही माता पिता है इस जग के सारे काम...
Posted on: Jan 22, 2020. Tags: CG DINANATH PATEL RAIGAGAHR SONG VICTIMS REGISTER
संगीत की तोफा लेकर आये हैं बड़ी दूर से...
रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से त्रिलोकी सिदार संगीत को लेकर पंक्ति सुना रहे हैं...
संगीत की तोफा लेकर आये हैं बड़ी दूर से-
सीजीनेट का साथ चाहिये-
संगीत को मनोरंजक बनाने के लिये-
संगीत एसा चीज है हर दुःख से मुक्त करता है-
जो व्यक्ति संगीत में रूचि रखता जीवन में सफलता पता है...
Posted on: Jan 21, 2020. Tags: CG POEM RAIGARH SONG TRILOKI SIDAR VICTIMS REGISTER
फागुन आता देखकर, उपवन हुआ निहाल...गीत-
जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से राकेश कुमार एक होली गीत कविता सुना रहे हैं:
फागुन आता देखकर, उपवन हुआ निहाल-
अपने तन पर लेपता, केसर और गुलाल-
तन हो गया पलाश-सा, मन महुए का फूल-
फिर फगवा की धूम है, फिर रंगों की धूल-
मादक महुआ मंजरी, महका मंद समीर-
भँवरे झूमे फूल पर, मन हो गया अधीर...
Posted on: Jan 21, 2020. Tags: ANUPPUR MP RAKESH KUMAR SONG VICTIMS REGISTER
माउन्टेन मैन दशरथ माझी...
माउन्टेन मैन दशरथ माझी का जन्म 14 जनवरी 1929 गहलौर, बिहार, भारत में हुआ वे बचपन में ही घर से भागकर धनबाद चले गये थे खदान में काम किया, वापस आने के बाद फालगुनी देवी से विवाह किया| गाँव से दूसरे गाँव गाने के लिये गहलोत पहाड़ पार कर जाना पड़ता था या चक्कर लगाकर जाना पड़ता था, उनकी पत्नी खाना ले जाते हुये पहाड़ी दर्रे से गिर गयी जिससे उनका निधन हो गया, पत्नी के गम से दुखी दशरथ माझी अपनी ताकत बटोरकर पहाड़ पर वार करने लगे, बोले जब तक तोड़ेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं, 1960 में पहाड़ तोड़ना शुरू किया और 1983 में उसे पूरा किया, 22 साल लगे, 17 अगस्त 2007 को नयी दिल्ली, में हुआ, उनकी मृत्यु पित्ताशय कैंसर के कारण हुआ, जिसके बाद राष्ट्रिय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, उनके इस कार्य से कई पीढियां प्रेरित होती रहेगी|
