कब कहोगे मेरा भारत महान...कविता
जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से दुर्गेश कुमार अपने विचारों को कविता के माध्यम से व्यक्त कर रहे हैं :
कब कहोगे मेरा भारत महान-
इसमे से एक भी नहीं बेईमान-
यह देश तुम्हारा है-
इसकी फिक्र भी तुम्हे ही करना है-
यदि तुम फिर सो जाओगे-
अपना कर्तव्य भूल जाओगे...
Posted on: Mar 19, 2019. Tags: DURGESH KUMAR MP POEM REWA SONG VICTIMS REGISTER
हर एक राजनेता और कारकर्ता, स्वयं को गांधी का अनुयायी कहते नही थकता...पंक्तियाँ
जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से दुर्गेश कुमार अपने विचारों को पंक्तियों के माध्यम से व्यक्त कर रहे हैं :
हर एक राजनेता और कारकर्ता-
स्वयं को गांधी का अनुयायी कहते नहीं थकता-
अंदर से भले ही गांधी के विचारो से असहमती रखते हों-
लेकिन सार्वजनिक रूप से खुद को-
गांधी का अनुयायी बताते नही थकते...
Posted on: Mar 19, 2019. Tags: DURGESH KUMAR MP POEM REWA SONG VICTIMS REGISTER
संभल-संभल के सीरी, झरथे धरती ऊपर...कविता-
ग्राम-बटई, पोस्ट-रेवटी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से दुर्गेश पटेल एक कविता सुना रहे हैं :
संभल-संभल के सीरी, झरथे धरती ऊपर-
टपकात गिरे पसीना, माथा छूथे छापर-
ध्यान चलत है चारो कोती, छिप गे काम-
छवांगे खेती-
छुगत ले आंखी मा आगे-
पाँव परत है, एती पेती...
Posted on: Mar 19, 2019. Tags: CG DURGESH PATEL POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
सुनले बापू ये पैगाम, मेरी चिट्ठी तेरे नाम...गीत-
ग्राम-बटई, पोस्ट-रेवटी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से दुर्गेश पटेल एक गीत सुना रहे हैं :
सुनले बापू ये पैगाम, मेरी चिट्ठी तेरे नाम-
चिट्ठी सबकी, सब में लिखता-
तुझको राम-राम-
सुनले बापू ये पैगाम, मेरी चिट्ठी तेरे नाम...
Posted on: Mar 19, 2019. Tags: CG DURGESH PATEL SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
किसी के बहकावे में न आकार सोच समझकर काम करना चाहिये...कहानी-
हिरन और सियार दोनों मित्र थे| दोनों एक सांथ कुएं पर पानी पीने के लिये जाते थे| दोनों एक दूसरे को सहारा देते हुवे पानी पीते हैं लेकिन सियार के मन में खोट होने के कारण वह हिरन को कुए में गिरा देता है| जिससे हिरन मर जाता है| उसी समय सियार आवाज लगता है जो हिरन को निकलेगा वो हिरन का सारा मांस खायेगा| वहीँ पास में कुछ किसान काम कर रहे होते हैं, वो आवाज को सुनकर आ जाते हैं| और हिरन को कुए से बाहर निकलकर उसका मॉस आपस में बाटने लगते हैं| तभी सियार अपना हिस्सा लेने आता है| तब किसान पूछते हैं| तुम यहां क्या कर रहे हो| हमने मेहनत से इसे निकला इस पर हमारा हक है| सियार ने कहा ठीक है| थोड़ा आग दे दो| किसानो उसे आग दिया और सियार ने उसे खेत में फेक दिया | किसानो के फसल जानने लगे तो सभी आग बुझाने के लिये भागे और सियार ने सारा मांस खा लिया | इस कहानी से सीख मिलती है कि किसी के बहकावे में न आकार सोच समझकर काम करना चाहिये|
