हरी भरी है बगिया हमारी लम्बी-लम्बी फूलों की क्यारी...कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
हरी भरी है बगिया हमारी लम्बी-लम्बी फूलों की क्यारी-
रंग बिरंगे फूल खिले हैं, कुदरत करती उनकी रखवाली-
हर मौसम में फूलता रहता, जमकर डाली-डाली-
तोड़कर ले जाता उनको, आकर बाग़ का माली-
रंग बिरंगे तितलियाँ आती, बाग़ की सुंदरता बढाने को-
मधुमक्खियां आती मधु चुराने को, भौरे होते गाने को...
Posted on: Jun 02, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
तू महलों कई रानी, मै गलियों का राजा...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
तू महलों कई रानी, मै गलियों का राजा-
तेरा-मेरा खूब जमेगा, चल बजवा लें लगन का बाजा-
तू बंगले की रानी होगी, मै संसद भवन का राजा-
आगे पीछे पुलिस की गाडी होगी, बीच में रानी-राजा-
घूमेंगे-फिरेंगे ऐश करेंगे, देश विदेश से होगा साझा-
रूस, अमेरिका, जापान, मलेशिया, सबका होगा साथ-
जो भो हो जरुर होगा हमारे पास...
Posted on: Jun 02, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
कलशा पानी गर्म है चीटिया नहावे झोल...कविता-
ग्राम-देवरी, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर से सुधीर साय एक कविता सुना रहे हैं :
कलशा पानी गर्म है चीटिया नहावे झोल-
अंडा लेके चीटिया चढ़े तो जानो बरखा हो भरपूर-
खेती करे सांझ के घरे सोये, पाके खेती चोर काट के ले-
पाका भैंसा, गागर, बैल, नारी कुलक्ष्नी, बालक छय-
उनसे बाचो सब तुम लोग राज छोडके साधे जोग...
Posted on: Jun 01, 2019. Tags: CG KAILASH SINGH POYA POEM PRATAPPUR SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
तितली उड़ी, तितली उड़ी...बाल कविता-
ग्राम पंचायत-दरबागुडा, विकासखण्ड-कोंटा, जिला-दक्षिण बस्तर (छत्तीसगढ़) से एक छोटी सी लड़की सरिता एक कविता सुना रही हैं :
तितली उड़ी, तितली उड़ी-
बस में चढ़ी, बस में चढ़ी-
ड्राइवर बोला आजा मेरे पास-
तितली बोली हट बदमास...
Posted on: Jun 01, 2019. Tags: BASTAR BHOLA BAGHEL CG POEM SONG VICTIMS REGISTER
मेरे नन्हें-नन्हें चूजो दूर कभी न जाना...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक बाल कविता सुना रहे हैं :
मेरे नन्हें-नन्हें चूजो दूर कभी न जाना-
जो भी हो पास तुम्हारे मिल बाँट खा लेना-
नन्हें-नन्हें पंख तुम्हारी उड़ने भी ढंग से नह सीखे हो-
कोमल-कोमल हाथ पाँव तुम्हारी संभलना भी नही सीखे हो-
ऊँची-ऊँची पहाड़ पर्वत ऊँची गहरी खाई है-
ठौर-ठौर पर ब्याध का पहरा उनके आँखे ऊँची ललचाई है...
