देख आया चंद्र बहना हूँ देता हूँ नेछाय आब मै...गीत-
सीजीनेट के साथी पूजा टेकाम एक कविता सुना रही हैं :
देख आया चंद्र बहना हूँ देता हूँ नेछाय आब मै-
पेड़ फोड़ फीट कई बैठा अकेला एक सीटे कई बराबर-
यहाँ रखे खाना चलना बांधे मुरेठा पीठ पर-
छोटे गुलाबी फूल का सज खड़ा है पास ही-
देख आया चंद्र बहना हूँ देता हूँ नेछाय ब मै-
पेड़ फोड़ फीट कई बैठा अकेला एक सीटे कई बराबर...
Posted on: Jul 03, 2019. Tags: POEM PUJA TEKAM SONG VICTIMS REGISTER
उखड़ती साँसों को, वो अक्सर संभाल लेता है...कविता-
प्रयाग विहार, मोतीनगर, रायपुर (छत्तीसगढ़) से वैद्य एच डी गाँधी चिकित्सक दिवस पर एक कविता सुना रहे हैं :
उखड़ती साँसों को, वो अक्सर संभाल लेता है-
अच्छे अच्छों को, मौत के मुँह से निकाल लेता है-
न वो हिन्दू देखता है, न कभी मुसलमान देखता है-
खुदा का बंदा है वो, हर शख्स में बस इंसान देखता है-
जख्म कितना भी गहरा हो, वो हिचकिचाता नहीं कभी-
घाव की गंदगी देखकर, वो सकुचाता नहीं कभी...
Posted on: Jul 01, 2019. Tags: CG HD GANDHI POEM RAIPUR SONG VICTIMS REGISTER
जरहा लूठी कसन जरत हवे, काड़ा असन चरत हवे...गीत-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
जरहा लूठी कसन जरत हवे, काड़ा असन चरत हवे-
मने मन मा घूरत हवे, भात पेज कसन चुरत हवे-
लुटागे खेत खलिहान, जिंदगी के जाऊन खास सामान-
जाकर ले मिलत रहिस धान, का ला खाके बचाबो प्रान-
धोखा हा हमन खा डारेन, दुनिया हा हमन लुटा डारेन...
Posted on: Jun 23, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
नानी तेरी मोरनी को मोर ले गये...गीत-
हल्दीबाड़ी, चिरमिरी, जिला-कोरिया (छत्तीसगढ़) से ऋचा सूर एक कविता सुना रहे हैं :
नानी तेरी मोरनी को मोर ले गये-
बाकी जो बचा था काले चोर ले गये-
खाके पीके, मोटे हो के चोर बैठे रेल में-
चोरो वाला डब्बा कट के पहुंचा सीधा जेल में-
नानी तेरी मोरनी को मोर ले गये-
बाकी जो बचा था काले चोर ले गये...
Posted on: Jun 20, 2019. Tags: CG KORIYA POEM RICHA SUR SONG VICTIMS REGISTER
लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती...कविता-
ग्राम पंचायत-खजूरी, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से राजू पैकरा एक कविता सुना रहे हैं :
लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती-
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती-
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है-
चढ़ती दीवारों पर सौ सौ बार फिसलती है-
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है-
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना नहीं अखरता है...
