गुरु बनाओ जान के सीखो ज्ञान विज्ञान के...कविता-
ग्राम-छुलकारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से कन्हैयालाल केवट एक कविता सुना रहे हैं :
गुरु बनाओ जान के सीखो ज्ञान विज्ञान के-
संगीत है सुर और तान के-
सराहना होता है चरित्रवान के-
पानी पियो छान के सोना मच्छरदानी तान के-
रक्षा करो इंसान के, कभी काम करो अनुदान के...
Posted on: Jul 19, 2019. Tags: ANUPPUR CG KANHAIYALAL KEWAT MP POEM SONG VICTIMS REGISTER
लेती नहीं दवाई माँ, जोड़े पाई-पाई माँ...कविता-
मालिघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक कविता सुना रहे है :
लेती नहीं दवाई माँ, जोड़े पाई-पाई माँ-
दुःख थे पर्वत, राई माँ, हारी नहीं लड़ाई माँ-
इस दुनियां में सब मैले हैं, किस दुनियां से आई माँ-
दुनिया के सब रिश्ते ठंडे, गरमा गरम रजाई माँ-
जब भी कोई रिश्ता उधड़े, करती है तुरपाई माँ-
बाबू जी तनख़ा लाये बस, लेकिन बरक़त लाई माँ-
बाबूजी थे सख्त मगर, माखन और मलाई माँ-
बाबूजी के पाँव दबा कर, सब तीरथ हो आई माँ-
नाम सभी हैं गुड़ से मीठे, मां जी, मैया, माई, माँ...
Posted on: Jul 18, 2019. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR POEM SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
इस समय नगरिहा खेत में जाकर...कविता-
ग्राम-छुलकारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से कन्हैयालाल केवट एक कविता सुना रहे हैं :
इस समय नगरिहा खेत में जाकर-
न जाने कितना मेहनत कर जाते हैं-
और बाजार में जाते बीज खरीदने-
तो कीमत सुनकर डर जाते हैं-
इसी अन्न को पाने के लिये-
किसान खेत, कलीहन में डेरा धर देता है...
Posted on: Jul 17, 2019. Tags: ANUPPUR KANHAIYALAL KEWAT MP POEM SONG VICTIMS REGISTER
ऑफिस में नौकर, घर में सयाना डोकर का बहुत बड़ा महत्व है...कविता-
ग्राम-छुलकारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से कन्हैयालाल केवट एक कविता सुना रहे हैं :
ऑफिस में नौकर, घर में सयाना डोकर का बहुत बड़ा महत्व है-
मित्र के दुःख में रोकर, सब्जी काटो धोकर का बहुत बड़ा महत्व है-
निद्रा में सोकर, पत्थर में ठोकर का बहुत बड़ा महत्व है-
खेती में बीज बोकर, किसानी में पाटा कोपर का बहुत बड़ा महत्व है...
Posted on: Jul 15, 2019. Tags: ANUPPUR KANHAIYALAL KEWAT MP POEM SONG VICTIMS REGISTER
हे जल जब तू आता धरती, हरे भरे हो जाता धरती...कविता-
ग्राम-छुलकारी, पोस्ट-पसला, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से कन्हैयालाल केवट एक कविता सुना रहे हैं :
हे जल जब तू आता धरती, हरे भरे हो जाता धरती-
हे जल जब तू आता धरती, नदी नालो से बाढ़ निकलती-
हे जल जब तू आता धरती, गाय भैस हरा चारा चरती-
हे जल जब तू आता धरती, बोये बीज अंकुरण करती-
हे जल जब तू आता धरती, तुझे देखकर गर्मी डरती-
हे जल जब तू आता धरती, मेढ़क भी टर्र-टर्र करती...
