जिन लोगो के पास कोई प्रूफ़ नहीं होगा...कविता-
रायपुर (छत्तीसगढ़) से भागीरथी वर्मा एक कविता सुना रहे हैं:
जिन लोगो के पास कोई प्रूफ़ नहीं होगा-
उसे हम पाकिस्तान बंगला देश भेजवायेंगे-
जिस पाकिस्तानी बंगलादेशी हिंदियो पास कोई प्रूफ़ नहीं होगा-
उसे हम भारत में नौकरी और माकान मुफ्त में दिलायेंगे-
जो भारत के बेरोजगार को नौकरी दे नहीं सकते-
सलवा जुडुम के डर से भागे आदिवासियों को माकन जमीन दे नहीं सकते-
सुप्रीम कोट के द्वारा आदेश करवाते हैं...
Posted on: Jan 02, 2020. Tags: BHAGIRATH VARMA CG POEM RAIPUR SONG VICTIMS REGISTER
लाला जी ने केला खाया...कविता-
ग्राम-गोटा जमुरी, पंचायत-बोरंड, जिला-नरायणपुर (छत्तीसगढ़) से कुमारी सारा उईके, कुमारी जैमती गोटा, कुमारी सुनीता दुग्गा और कुमारी कनक उईके एक कविता सुना रही हैं :
लाला जी ने केला खाया-
केला खा कर मुह पिचकाया-
मुह पिचकाकर कदम बढाया-
पैर के नीचे छिलका आया-
लाला जी फिर गिरे धडाम-
मुह से निकला हाय राम...
Posted on: Jan 01, 2020. Tags: CG NARAYANPUR POEM SONG SUKHDAI MATRA VICTIMS REGISTER
चाटी माटी मा खेले बाटी, बाबा कहें आ रे नाती ... छत्तीसगढ़ी कविता
ग्राम+पोस्ट-सिलाटी, जिला-कबीरधाम(छत्तीसगढ़) से मुनेन्द्र गुप्ता एक कविता सुना रहे हैं:
चाटी माटी मा खेले बाटी, बाबा कहें आ रे नाती-
दादा हा बेटा ला मरथ हवे लाठी लाठी-
लेकिन दाई के तो जरत हवे छाती-
टुरी मन हा गोल में पहने हवे साड़ी-
टूरा मन तो घला खेलत हवे बाटी-
अरे भईया मैं तो मर गयव सब झन चलव मोर काठी...
Posted on: Dec 26, 2019. Tags: CG KABIRDHAM MUNENDRA KUMAR POEM SONG VICTIMS REGISTER
नहीं हुआ है अभी सबेरा, पूरब की लाली पहचान...कविता-
चट्टी, जिला-ईस्ट गोदावरी (तेलंगाना) से राजू राणा किसान को लेकर एक कविता सुना रहे हैं :
नहीं हुआ है अभी सबेरा, पूरब की लाली पहचान-
चिडियों के जगने से पहले, खाट छोड़ उठ गया किसान-
खिला-पिलाकर बैलों को लेकर, करने चला खेत पर काम-
चिडियों के जगने से पहले, खाट छोड़ उठ गया किसान-
खिला-पिलाकर बैलों को लेकर, करने चला खेत पर काम-
नहीं हुआ है अभी सबेरा, पूरब की लाली पहचान...
Posted on: Dec 18, 2019. Tags: POEM RAJU RANA SONG TELANGANA VICTIMS REGISTER
गांव गली खेतो में मिट्टी...कविता-
बाघझर, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से धन्नू बघेल एक कविता सुना रहे हैं :
गांव गली खेतो में मिट्टी-
बाहर मिट्टी घर में मिट्टी-
टप टप बूंद पड़ी तो महकी सोंधी सोंधी मिट्टी-
मिट्टी से घर बने हैं कितने-
मिट्टी पर लोग खड़े हैं कितने-
दिन भर फूल खिलाती मिट्टी-
सबका बोझ उठाती मिट्टी...
