राष्ट्र के युवा तुम्हे बुला रही है भारती...पंक्तियाँ-
जिला-बड़वानी मध्यप्रदेश से सुरेश कुमार देश से संबंधित पंक्तियाँ सुना रहे है :
राष्ट्र के युवा तुम्हे बुला रही है भारती-
जाग नौजवान जाग संस्कृति पुकारती-
उग्रवाद संस्कृति की असीमता मिटा रहा-
त्यागवाद संस्कृति की मूल्य को घटा रहा...
Posted on: Sep 18, 2021. Tags: BADWANI MP PANKTIYAN SURESH KUMAR
हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं...गीत-
बड़वानी, मध्यप्रदेश से सुरेश कुमार एक गीत सुना रहे हैं, जिसके बोल है, “हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं” | अपने गीत, संदेश रिकॉर्ड करने के लिये 08050068000 पर मिस्ड कॉल कर सकते हैं|
Posted on: May 16, 2021. Tags: BADWANI MP SONG SURESH KUMAR
रंग बिरंगे तितली दिखती...कविता-
बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार कविता सुना रहे हैं:
तितली के दुनिया में आओ बच्चो-
रंग बिरंगे तितली दिखती-
प्यारी-प्यारी अच्छी दिखती-
तितली बैठती प्यारे-प्यारे फूलो पर-
न्यारे-न्यारे फूलो पर-
रंग बिरंगे फूलो पर देखो बच्चो...(AR)
Posted on: Mar 24, 2021. Tags: BADWANI MP POEM SURESH KUMAR
एक बुद्धिमान यात्री की कहानी...
सुरेश कुमार जिला-बड़वानी मध्यप्रदेश से कहानी सुना रहे है बुद्धिमान यात्री एक बार एक यात्री जंगल से गुजर रहा था |गर्मी बहुत अधिक थी उसने प्यास महसूस की वह पानी की तलाश की परन्तु असफल रहा |अंत में वह एक नारियल के पेड़ के नीचे आया पेड़ पर बहुत से नारियल लटक रहे थे |वे इतने ऊँचे थे की यात्री उन तक नहीं पहुच रहा था और वह पेड़ पे चढ़ने में असमर्थ था |पेड़ पर कुछ बन्दर थे | यात्री बहुत बुद्धिमान था| उसने एक तरकीब सोची और वह बंदरो को कुछ पत्थर फेका| बन्दर बहुत नाराज हुए और कुछ नारियल तोड़कर यात्री की तरफ फेके| यात्री ने नारियल फोड़े और उसका पानी पिया| इस प्रकार उसने अपने प्यास बुझाई और चल दिया|... (183890)
Posted on: Mar 19, 2021. Tags: BADWANI MP STORY SURESH KUMAR
ओस की बूँद-सी होती है बेटियां...प्रेरणादायक विचार-
सुरेश कुमार बड़वानी, मध्यप्रदेश से बेटियों के लिए कुछ लाइने सुना रहे हैं -”ओस की बूँद सी होती है बेटियां, फर्श खुरदुरा हो तो रोती है बेटियां, रोशन करेगा बेटा तो बस एक ही कुल को दो-दो कुलों की लाज को ढोती है बेटियां, हीरा है अगर बेटा तो मोती है बेटियां औरों के लिए फूल ही बोती है बेटियां, मिट्टी में मर-नीर सी होती है बेटियां, घर की शान होती है बेटियां, माँ-बहन, पत्नी का फ़र्ज निभाती है बेटियां, इस कुल को आगे बढाती है बेटियां, सोना है अगर बेटा तो चांदी है बेटियां,बेटे को अच्छा खाना खिलाते हैं तो बेटियों को जूठन, बेटियां हो तो गृहस्थी को सजाती है, बेटियां हो तो दूसरों के आँगन की लाज बन जाती है, ओस की बूँद सी होती है बेटियां, इस फर्श खुरदुरा हो तो रोती है बेटियां”|
