रात काहे रोये रे ललन मा, सुबेरे गुनगुन मा मंगइबे...छत्तीसगढ़ से लोकगीत
राजेन्द्र चंदेल, ग्राम-टिकुरीटोला, तहसील-भरतपुर, जिला-कोरिया, छत्तीसगढ़ से लोक गायिका ललिता कुशवाहा के एक गीत की रिकॉर्डिंग कर रहे हैं. गीत में माँ अपने नवजात बच्चे को लोकधुनों पर आधारित लोरी के माध्यम से बहला रही है कि रात में मत रो, चुप हो जाओ, सुबह खिलौना मंगा दूंगी...
रात काहे रोये रे ललन मा
सुबेरे गुनगुन मा मंगइबे
गुन मा मंगइबे गुनगुन मा मंगइबे
रात काहे रोये...
ससुरे मा होती, तो सासू से कहती
मइके मा, अम्मा से लजानी
सुबेरे गुनगुन...
ससुरे मा होती तो, जेठी से कहती
मइके मा, चाची से लजानी
सुबेरे गुनगुन...
ससुरे मा होती तो, ननदी से कहती
मइके मा, भाभी से लजानी
सुबेरे गुनगुन...
ससुरे मा होती तो, छोटी से कहती
मइके मा, बहिनी से लजानी
सुबेरे गुनगुन मा मंगइबे
रात काहे रोये रे ललन मा
सुबेरे गुनगुन मा मंगइबे...
