हमर कतका सुन्दर गांव जैसे लक्ष्मी जी के पांव...छत्तीसगढ़ी कविता
ग्राम-मेंडारी, पोस्ट-करमडीहा, तहसील-वाड्रफनगर, थाना-बसंतपुर,जिला-बलरामपुर, (छत्तीसगढ़) से कक्षा 6 के छात्र रामसजीवन एक कविता सुना रहे हैं :
हमर कतका सुन्दर गांव जैसे लक्ष्मी जी के पांव-
घर उज्जर लीपे पोते जेला देख हवेली रोथे-
सुघर चिकनाई भूमि है चाहे भात परोस ले गुईंया-
अंगना माँ तुलसी के घरुआ कोठा मा बैला घरुआ-
लट्ठा माँ कोल्बहरी जा बोथन साग तरकारी-
ये हा अंनपूर्णा के ठाठ...
