काम बंद है, घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, मदद करें...(मराठी में)
मोहगांव, साचे बस्ती, गली नंबर 2, पुणे (महाराष्ट्र) से रचना प्रकाश साल्वी बता रही हैं वे परिवार के साथ लॉकडाउन में हैं, काम बंद होने से दिक्कत होती है, घर का किराया नहीं दे पा रहे हैं, राशन नहीं मिल रहा है, परिवार में 4 सदस्य हैं, घर में भोजन व्यवस्था को लेकर चिंतित हैं, इसलिये सीजीनेट के श्रोताओं से निवेदन कर रहे हैं कि अधिकारियों से संपर्क कर भोजन व्यवस्था करें और उनकी चिंता दूर करने में मदद करें : संपर्क नंबर@8530022430. (167385)
Posted on: May 18, 2020. Tags: CORONA PROBLEM PUNE RACHANA PRAKASH SALVI SONG VICTIMS REGISTER
देख तो नोनी कैसन करथे झड़ी, छोड़त नई आय एको घरी...रचना-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक रचना सुना रहे हैं :
देख तो नोनी कैसन करथे झड़ी-
छोड़त नई आय एको घरी-
हेर चाउर दार ला और ओला छर डार-
कछू साग नइये, गिद ला दर डार-
निकलथे बतकिरी, झन करबे रात-
अंजोर-अंजोर खाबो दार भात...
Posted on: May 29, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RACHANA RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
चिमनी गवागे, बिजली मलमलाई, आप लोग लईका मन के देखे बर...रचना-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक स्वरचित रचना सुना रहे हैं :
चिमनी गवागे, बिजली मलमलाई-
आप लोग लईका मन के देखे बर-
पर जाही का कर लाई-
अब नवा नवा अवाथे जिहिस समान-
हमर निकाल लिही गा परान-
बैला भैसा नागर हर तोर लुटा गईस...
Posted on: Apr 06, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RACHANA RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
क्या रंगों मै होली के रंग में लाला...रचना-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक स्वरचित रचना सुना रहे हैं :
क्या रंगों मै होली के रंग में लाला-
सुने हवों, निखार इनका भी, मीरा कोयला कला-
कुदत हवों गांव-गांव घर उजर जाही-
आने कोती ले कूकुर कसन-
हुदा-हुदा मन के आंही...
Posted on: Mar 19, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RACHANA RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
जो पहना हथकड़ी, उसे पड़ा छड़ी-छड़ी...व्यंग रचना-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र गुप्ता एक व्यंग रचना सुना रहे हैं:
जो पहना हथकड़ी, उसे पड़ा छड़ी-छड़ी-
देश के खातिर शूरवीरो में आपत पड़ी-
अंग्रेजो से लोहा लेने, पड़ी उन्हें कई छड़ी-
अब पाकिस्तान की बारी, उसे पड़ चुकी कई छड़ी-
फिर भी न सुधरे पाकिस्तान, तुझे मूकी खानी पड़ी...
