" वे डरते हैं ": कविता
” वे डरते हैं ”
वे छात्रों से नहीं डरते,
वे बेरोजगारों से नहीं डरते,
वे मजदूरों से नहीं डरते,
वे किसानों से नहीं डरते,
वे आदिवासियों से नहीं डरते,
वे जनता से भी नहीं डरते,
जिनके कंधे पर सवार रहते हैं,
जिनको लूट कर खाते हैं,
क्योंकि उनको दबाने,
पुलिस फौज जो बनाकर रखे हैं,
वे डरते हैं कवियों से लेखकों से,
वे डरते हैं सांस्कृतिक कर्मियों से कार्टूनिस्टों से,
वे डरते हैं सोशल मिडिया के पत्रकारों से,
वे डरते हैं अपंग साईं बाबा जैसे विचारवानों से,
वे डरते हैं बराबर राव जैसे विचारवानों से,
वे डरते हैं सुधा भारद्वाज के जैसे,
अनेकों विचारवान महिला पुरूषों से,
कहीं ये विचारवान लोग,
हमारे लूट रूपी राज सत्ता को नेस्तनाबूद कर,
अमीरी गरीबी खत्म कर,
समतामूलक राज न बना दे ।
” मजदूर ”
Posted on: Oct 29, 2024. Tags: Bhagirathi Verma Poem
कविता : हिन्दू राष्ट्र
रायपुर, छत्तीसगढ़ से भागीरथी वर्मा एक कविता सुना रहे हैं:
हमारा देश एक लौता हिन्दू राष्ट्र है-
जहाँ मिट्टी की औरत को श्रृंगार कर-
देवी माँ कहकर पुकारा जाता है-
मिट्टी की दुर्गा माँ की पूजा होती है...
Posted on: Aug 13, 2023. Tags: BHAGIRATHI VARMA CG POEM RAIPUR
सुधा भारद्वाज कौन है...कविता
रायपुर (छत्तीसगढ़) से भागीरथी वर्मा एक कविता सुना रहे हैं:
सुधा भारद्वाज कौन है सुधा हमारा आदर्श-
हमारा वकील है सुधा हमारा हौसला-
हमारा हिम्मत है मजदूर किसान-
आदिवासियों का नेतृत है-
सुधा भारद्वाज कौन है सुधा युवा-
महिला सेयान की ताकत है बीमार असहाय मानसिक विकलांगता प्रेरणा...(AR)
Posted on: Jun 14, 2021. Tags: BHAGIRATHI VARMA CG POEM RAIPUR
पुराने ज़माने में...कविता-
रायपुर (छत्तीसगढ़) से भागीरथी वर्मा एक कविता सुना रहे हैं:
पुराने ज़माने में राजा प्रजा को-
बेडियो में जकड के रखा करता था-
प्रजा को अन्धविश्वाश में डूबा कर रखा करता था-
पुरोहितो द्वारा कहलवाया करता था-
राजा भगवान होता है जो पुरोहित का बात नही मानेगा-
उसे क़त्ल कर देने का फरमान सुनाया करता था-
आज की सरकार वही करने जा रही है जनता को-
मंदिर मस्जिद हिन्दू मुस्लिम में उलझाते जा रही है...(AR)
Posted on: Jun 11, 2021. Tags: BHAGIRATHI VARMA CG POEM RAIPUR
सरकार तानाशाह हो गया है...कविता-
रायपुर (छत्तीसगढ़) से भागीरथी वर्मा एक कविता सुना रहे हैं जिसका शीर्षक है सरकार तानाशाह हो गया है:
सरकार तानाशाह हो गया है-
हर अच्छे कार्य करने लगे हैं-
लोग छुप छुप कर-
अब सुबह सुबह टहलने भी-
बीमारी भी ऐसा ला दियें हैं बीमारी का ऐसा प्रचार कर दिये हैं...(AR)
