किसी के काम जो आए, उसे इंसान कहते है...प्रेरणा गीत
ग्राम-राम्हेपुर, जिला-बालाघाट, (मध्य प्रदेश) से
सरला श्रीवास एक गीत सुना रही है:
किसी के काम जो आए, उसे इंसान कहते है-
पराया दर्द जो अपनाए, उसे इन्सान कहते है-
कभी धनवान है कितना, कभी इन्सान निर्धन है-
कही सुख है, कही दुःख है, इसी का नाम जीवन है-
जो मुश्किल में ना घबराए, उसे इन्सान कहते है-
किसी के काम जो आए, उसे इंसान कहते है-
ये दुनिया एक उलझन है, कही धोका, कही ठोकर-
कोई हँस के जीता है, कोई जीता है रों रों कर-
जो गिरकर फिर सँभल जाए, उसे इन्सान कहते है-
किसी के काम जो आए, उसे इंसान कहते है...
Posted on: Apr 01, 2017. Tags: SARLA SHRIWAS SONG VICTIMS REGISTER
रे रेलों लोयो रे रेला रे रेला रे लोयो रे रेला...गोंडी गीत
ग्राम-रोंडावाई, पोस्ट-घट्टा, तहसील-धनोरा, जिला-गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) से दीपिका मडावी एक गोंडी गीत सुना रही हैं:
रे रेलों लोयो रे रेला रे रेला रे लोयो रे रेला-
अगा डुकेती मडा कोडी ते रे डुकेती-
मडा फुरुंग ते तुरसा डुकेती-
आहके वियादे आचा गियादी-
बाई फला ते ओन गियादी निवा देश ते
रे रेलों लोयो रे रेला रे रेला रे लोयो...
Posted on: Mar 29, 2017. Tags: SONG SUKHRAM ATALA VICTIMS REGISTER
बचपन में माई, काहे कर दी सगाई, मोरी सुनले दुहाई, मेरी माई रे...गीत
ग्राम-राम्हेपुर, तहसील-बैहर, जिला-बालाघाट (मध्यप्रदेश) से सरला श्रीवास गीत सुना रही है गीत के माध्यम से बेटी अपनी माँ से पूछ रही है कि बचपन में ही मेरी सगाई क्यों कर दी:
बचपन में माई, काहे कर दी सगाई-
मोरी सुनले दुहाई, मेरी माई रे-
थोड़ी हुई सयानी, छिन ली हाथों से गुड़िया-
चूल्हे चोका, बर्तन तकिया सिमटी मेरी दुनिया-
बैरन भोजाई आग, कैसी लगाई-
मोहे आई रुलाई, मोहे माई रे-
मोरी सुनले दुहाई, मेरी माई रे-
छोटा भय्या जब जाए मदरसा, मै मन मन में रोऊ-
उमर पड़ाई की है फिर भी, घर में बर्तन धोऊ-
चोखट पे माई, लक्ष्मण रेखा बनाई-
कैसे लाघु ये खाई, मोरी माई रे-
मोहे आई रुलाई, मोहे माई रे-
कर दी अगर सगाई, लेकिन शादी जल्दी मत करना...
Posted on: Mar 29, 2017. Tags: SARLA SHRIWAS SONG VICTIMS REGISTER
आदिवासी को अधिकतर रोज़गार जंगल से ही मिलता है, बरसात के समय हम खेत में काम करते हैं...
ग्राम-कुतेगाँव, तहसील-धनोरा, जिला-गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) से मीना मडावी के साथ में सुखराम अटाला ग्राम-रोंडावाई, तहसील-धनोरा, जिला-गढ़चिरोली के रहने वाले है और अभी वो जिला-अनूपपुर मध्यप्रदेश में है बता रहे है कि आदिवासी समाज में किस तरह से वे अपना जीवन यापन करते है और किस तरह से रोजगार मिलता है उसके बारे में जानकारी दे रहे है, वे कह रहे हैं कि आदिवासी मूलत: जंगल पर ही अपने जीवन के लिए निर्भर होता है जहां से उसे जीवनयापन के लिए बहुत सी चीज़ें मिलती हैं. बारिश के समय में लोग मजदूरी करने लिए अपने और दूसरो के यहाँ जाकर भी खेत का काम भी करते है जैसे जोतना, बोना, निदाई करना ये उनके लिए एक रोजगार भी होता है| ऐसा वे गोंडी बता रहे है| मीना@7719930515
Posted on: Mar 26, 2017. Tags: SONG SUKHRAM ATALA Gondi VICTIMS REGISTER
आदिवासी 70 साल से ज़मीन पर रह रहे, प्रशासन उन्हें हटा रहा, अधिकारी को फोन कर मदद करें...
ग्राम-फरसागुडा, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से जया ध्रुव बता रही है एक आदिवासी रूपलाल 65-70 वर्षो से जमीन पर काबिज है लेकिन कुछ बाहरी लोगों ने जमीन खरीद लिया है. कुछ दिनों पहले तहसीलदार द्वारा सूचना दी गई कि एक सप्ताह में घर खाली कर दो नहीं तो घर तोड़ दिया जायेगा. बस्तर आदिवासी क्षेत्र होने के बावजूद यहाँ पर आदिवासियों को अपनी ही जमीन से बाहरी लोगो द्वारा धन बल के साथ बेदखल किया जा रहा है. सीजीनेट सुनने वाले सभी साथियों से अपील है कि कृपया इनका घर जमीन बचाने में मदद कीजिये, मदद करने के लिए आप तहसीलदार के इस नम्बर पर फ़ोन कर दबाव बनाए जिससे गरीब आदिवासियों के घर जमीन को बचाया जा सके. तहसीलदार@9584603977. जया@9111529862.

