बचपन में माई, काहे कर दी सगाई, मोरी सुनले दुहाई, मेरी माई रे...गीत
ग्राम-राम्हेपुर, तहसील-बैहर, जिला-बालाघाट (मध्यप्रदेश) से सरला श्रीवास गीत सुना रही है गीत के माध्यम से बेटी अपनी माँ से पूछ रही है कि बचपन में ही मेरी सगाई क्यों कर दी:
बचपन में माई, काहे कर दी सगाई-
मोरी सुनले दुहाई, मेरी माई रे-
थोड़ी हुई सयानी, छिन ली हाथों से गुड़िया-
चूल्हे चोका, बर्तन तकिया सिमटी मेरी दुनिया-
बैरन भोजाई आग, कैसी लगाई-
मोहे आई रुलाई, मोहे माई रे-
मोरी सुनले दुहाई, मेरी माई रे-
छोटा भय्या जब जाए मदरसा, मै मन मन में रोऊ-
उमर पड़ाई की है फिर भी, घर में बर्तन धोऊ-
चोखट पे माई, लक्ष्मण रेखा बनाई-
कैसे लाघु ये खाई, मोरी माई रे-
मोहे आई रुलाई, मोहे माई रे-
कर दी अगर सगाई, लेकिन शादी जल्दी मत करना...

