पुनरपि जन्म पुनरपि मरणम, ये काया विनाशनम...जीवन कथा
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक हकीकत कथा सुना रहे हैं: पुनरपि जन्म पुनरपि मरणम, ये काया विनाशनम: जैसे सृष्टि में चार ऋतु होते हैं शरद, बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, ठीक उसी प्रकार जीवों की भी चार अवस्था होती है, बचपन, लड़कपन, जवानी, बुढ़ापा, लेकिन ये चक्र तब तक चलती है जब तक सृष्टि है.मनुष्य और जीव जंतु की आयु सीमा समाप्त हो जाती है और वह एक दिन मृत्यु को प्राप्त हो जाती है यहां जो भी जीव आता है ये शरीर छोड़कर जीवात्मा उड़ जाता है| जितना दिन भटकने का रहता है उतना दिन भटकने के बाद पुनः इस धरती में जन्म लेता है और कर्म के अनुसार दुःख-सुख को काटने के बाद पुनः उन्ही चार अवस्था में वापस हो जाता है...
कन्हैयालाल पडियारी@9981622548.
Posted on: Sep 04, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
ये पुस्तक कापी ही शैतान हो गये हैं...व्यंग्य
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैया लाल पडियारी व्यंग्य कविता सुना रहे हैं:
मम्मी- बेटा शैतानी छोड़ दो और पढाई-लिखाई में ध्यान दो-
बेटा- मम्मी मै शैतानी कहां करता हूँ, ये पुस्तक कापी ही शैतान हो गये हैं चैन से रहने नही देते-
मम्मी- बेटा पढ़-लिखकर क्या बनोगे-
बेटा- मम्मी मै पढ़-लिखकर नेता बनूंगा-
मम्मी- बेटा नेता तो देश बेच डालते हैं
बेटा- मम्मी मै तो सब कुछ बेच डालूँगा यहां तक की अपने घर-द्वार सब बेच दूंगा और विदेश चला जाउंगा-
मम्मी- बेटा तो हम कहां रहेंगे-
बेटा- जहां सब कोई रहते हैं वही रह लेना-
मम्मी- बेटा वहां फिटिर-फिटिर बहत होता है-
बेटा- मम्मी आप भी तो ज्यादा फिटिर-फिटिर करते हैं, एक घडी चैन से रहने नही देते...
Posted on: Sep 03, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
आवाज़ पेड़ों की...प्रकृति कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे है:
पेड़ों की झुरमुटों से आती है पैगाम-
मै शान्ति की प्रतीक हूँ-
मुझसे ही तो माँ-
मुझसे तुम हो, तुमसे मैं नहीं-
मै तो प्राकृति की देन हूँ-
पवन मुझे सुलाती है, पवन हमे उठाती है-
पवन की झोकों से बिखर कर अपने आप उग आती हूँ...
Posted on: Sep 01, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
फिर देश को बचाने वाले कौन महापुरुष आएंगे...व्यंग्य कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैया लाल पडियारी एक व्यंग्य कविता सुना रहे हैं:
देशवासियों पकौड़ा छानो-
खाने वाले ग्राहक न मिले तो कुत्तों को खिलाना-
कुत्ता भी न खाए तो पशुओं को खिलाना-
पशु भी न खाए तो नेताओं को खिलना-
नेता भी न खाए तो विदेशियों को बुलाना-
विदेशी को पकौड़ा खाते-खाते देश को खा जायेंगे-
फिर देश को बचाने वाले कौन महापुरुष आएंगे-
बड़ी मुश्किलों से आजादी मिली है-
आजादी के बेडी से ऊब गये हो तो-
स्वतन्त्रता की बेडी पहनो-
मेरे देश वासियों पकौड़ा छानो...
Posted on: Sep 01, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
मैना पडकी बारी धरी कबुत्तर छानी उप्पर...छत्तीसगढ़ी कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैया लाल पडियारी छत्तीसगढ़ी भाषा में एक कविता सुना रहे हैं :
मैना पडकी बारी धरी कबुत्तर छानी उप्पर-
जंगल मा मोर नाचे दिखे अडबड सुग्घर-
कौआ करे काँव-काँव कोयल कुहके कूहु-कूहु-
तीतुर खोजे आपन छाँव देख तो गा दाऊ बडकु-
सुआ हर पिंजडा में डोला थे मिट्ठू-मिट्ठू दे थय पतूरु-
बड़े भौजी बोला थे कुकरी ला बड़े भौजी कहथे कुरु-कुरु...
