सूरज के आते भौर हुआ लाठी ले जिनका शोर हुआ...नागपंचमी कविता-
जिला-राजनंदगाँव छत्तीसगढ़ से वीरेंद्र गन्धर्व आज नागपंचमी का पर्व है, कई लोग उपवास करते है नागदेवता को दूध पिलाते है और कामना करते है कि उनके जीवन में सुख शांति रहे है, पहले तो कुश्ती हुआ करती थी स्थान-स्थान में और आज भी हुआ करती है| उसी सम्बंधित एक कविता सुना रहे है :
सूरज के आते भौर हुआ-
लाठी ले जिनका शोर हुआ-
यह नागपंचमी झम्मक झम-
यह ढोल डामाका झम्मक झम-
मल्लो की जब टोली निकली-
चर्चा निकली फैली गली-गली...
Posted on: Jul 25, 2020. Tags: NAGPANCHMI POEM RAJNANDGAON CG SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
बच्चो के लिये हिन्दी पर्यावाची शब्द...
राजनांदगाँव, छत्तीसगढ़ से विरेन्द्र गंधर्व बच्चो के लिये पर्यायवाची शब्द बता रहे हैं:
आग- पावक, हुतासन, अग्नि, वैश्वानर, वैहिनी, शानू, दहन,
आकाश – गगन, नभ, अम्बर, व्योम, अनंत,
ऐसे जानकारियों को रिकॉर्ड करने के लिये 08050068000 पर मिस्ड कॉल कर रिकॉर्ड कर सकते हैं| (AR)
Posted on: Jul 24, 2020. Tags: CG EDUCATION RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
23 जुलाई आजाद जयंती पर संदेश...
राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व 23 जुलाई को आजाद जयंती पर संदेश दे रहे हैं, आज के दिन महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद और लोकमान्य तिलक की जयंती मनाई जाती है, आज के दिन उन्हें याद किया जाता है और आजाद जयंती मनाया जाता है| (AR)
Posted on: Jul 23, 2020. Tags: CG RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
दो दिन की जिंदगी हस हम गुजार दें...गीत-
राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक गीत सुना रहे हैं:
दो दिन की जिंदगी हस हम गुजार दें-
तुम हमें प्यार दो हम तुम्हे प्यार दें-
अज्ञानता का नाश हो ज्ञान का प्रकाश हो-
काम क्रोध दंभ लोभ किसी के न पास हो-
दुखियो के आंसू ले, सुख का उपहार दे-
दो दिन की जिंदगी हस हम गुजार दें-
तुम हमें प्यार दो हम तुम्हे प्यार दें... (AR)
Posted on: Jul 23, 2020. Tags: CG RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
तब भी सावन आता था, अब भी सावन आता है...कविता-
राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व सावन पर एक कविता सुना रहे हैं:
तब भी सावन आता था-
अब भी सावन आता है-
पहले जैसा सावन नहीं है-
सावन पहले होता था मनभावन-
अब सावन मनभावन नहीं है-
कहीं तो इतना बरसा कि नदियों में बाढ़ आ गयी-
कही तो मानव बूंद बूंद को इतना तरसा कि समस्या तराह आ गयी... (AR)
