एदे होरी हो धूमा-धूमा करे घाम अकाबक छूटाथे परान हा...सरगुजिया गीत
ग्राम-देवरी, पोस्ट-चंदोरा, जिला-सूरजपुर, (छत्तीसगढ़) कैलाश सिंह पोया एक सरगुजा भाषा में गीत सुना रहा है:
एदे होरी हो धूमा-धूमा करे घाम-
अकाबक छूटाथे परान हा-
सुखी तो गये नदी ढोढी रे-
सुखी गये फुलवार नही मिलय कंचा पान्हर...
Posted on: May 20, 2019. Tags: CG KAILASHSINGH POYA SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
रायपुर की क्या शानी अपनी है राजधानी...कविता
ग्राम-देवरी, पोस्ट-थाना-चंदोरा, जिला-सूरजपुर, ( छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया कविता सुना रहा है:
अपना प्रदेश देखो कितना विशेष देखो-
आओ-आओ घुमो यहाँ खुशियाँ से झूमों-
रायपुर की क्या शानी अपनी है राजधानी-
ऊँचे-ऊँचे है मकान यहाँ की निराली शान-
कोरबा की बिजली हम सब को मिली-
देव भोग का है मान हीरे की है जहाँ खदान-
लोहे के ढलाई देखो, देखो जी भिलाई देखो...
Posted on: May 18, 2019. Tags: CG KAILASHSINGH POYA POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
उनके मन में लोभ नहीं है, पाप नहीं, परवाह नहीं...कविता-
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलास सिंह पोया एक कविता सुना रहे हैं :
उनके मन में लोभ नहीं है,
पाप नहीं, परवाह नहीं,
जग का सारा माल हड़प कर,
जीने की भी कोइ चाह नहीं,
जो मिलता है अपने छम से
उतना भर लेते हैं,
औरों के हित उसे छोर देते हैं...
Posted on: May 18, 2019. Tags: CG KAILASH SINGH POYA POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
बैंक से लोन नहीं मिल रहा है...मदद करे
ग्राम- पपनी तहसील- प्रतापपुर जिला- सुरजपुर (छत्तीसगढ़) से संतोष देव मरावी अपना समस्या बता रहे हैं| यह बोल रहे है की, जिला सूरजपुर कार्याल कुटयोग से 1 लाख का लोन पास कराया था, वहां से पास हो गया पर बैंक मैनेजर लोन नहीं दे रहा है| पिछले 3 महीने से घुमा रहा है| बैंक का नाम कैनरा बैंक है, शाखा नंबर- 06058 है| इसलिए वे सीजीनेट के साथियों से अपील कर रहे हैं इनकी मदद करें| बैंक मैनेजर @8959909086 टोल फ्री नंबर@180023332000| संपर्क नंबर@7828813973
Posted on: May 17, 2019. Tags: CG CHHATISGARH SANTOSH DEV MARAWI SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
ले मसाल चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के...कविता
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलास सिंह पोया एक समाजवाद पे एक कविता सुना रहे हैं :
ले मसाल चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के,
अब अँधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गांव के,
पुछते हैं झोपड़ी, पुछते हैं खेत भी,
कब तक लूट ते रहेंगे लोग मेरे गांव के,
बिन लडे मिलता यहाँ जान कर,
अब लड़ाई लड़ रहें हैं लोग मेरे गाओं के...
