स्वास्थ्य स्वर : चातुर्थिक ज्वर का घरेलू उपचार...
ग्राम-रनई, थाना-पटना, जिला-कोरिया (छत्तीसगढ़) से वैद्य केदारनाथ पटेल डोंडा अफीम के औषधीय उपयोग बता रहे हैं, ज्वर रोग में 1 डोंडे और 7 काली मिर्च को उबालकर सुबह शाम रोगी को पिलाने से चतुर्थिक ज्वर में लाभ हो सकता है, संबंधित विषय पर जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं: संपर्क नंबर@9826040015. (AR)
Posted on: Jun 25, 2020. Tags: CG HEALTH KEDARNATH PATEL KORIYA SONG VICTIMS REGISTER
वृद्धावस्था पेंशन के लिये 5 साल से आवेदन दे रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है...
ग्राम-नवलपुर, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से चंद्रिका बाई बुनकर बता रही हैं, वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिल रहा है, उन्होंने इसके लिये कई बार आवेदन किया है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है, 5 साल से आवेदन कर रहे हैं लेकिन काम नहीं हो रहा है इसलिये वे सीजीनेट के साथियों से अपील कर रही हैं कि अधिकारियों से बात कर समस्या का निराकरण कराने में मदद करें : संपर्क नंबर@8720822286.
Posted on: Jun 25, 2020. Tags: CG CHANDRIKA BAI BUNKAR MUNGELI OLD AGE PENSION SONG VICTIMS REGISTER
हम तो रोज नहाते हैं, मैल को दूर भगाते हैं... बाल कविता-
ग्राम-नवलपुर, ब्लाक-लोरमी, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से उषा गोस्वामी एक कविता सुना रही हैं:
हम तो रोज नहाते हैं, मैल को दूर भगाते हैं-
मंजन करते कुल्ला करते, मुह की गंध भगाते हैं-
नख कटवाते नाक सुड़कते सिर में तेल लगाते हैं-
कंघी करते तेल लगाते बालो को चमकाते हैं-
कपड़े साफ पहनकर हम आंगनबाड़ी जाते हैं-
चावल दाल खाते हैं, हम मोटे बन जाते हैं...(AR)
Posted on: Jun 25, 2020. Tags: CG MUNGELI POEM SONG USHA GOSHWAMI VICTIMS REGISTER
सीता पति वरता को, फिर से कहां पाओगे...भजन-
खैरागढ़, राजनादगांव (छत्तीसगढ़) से रेखा कंट्रा एक गीत सुना रही हैं:
सीता पति वरता को, फिर से कहां पाओगे-
धोबी के कहने पर, दोष जो लगाओगे-
और बार श्री राम अग्नी पर बिठाओगे-
सीता पति वरता को, फिर से कहां पाओगे-
क्या तुम्हे यकीन नहीं है सीता की अग्नी परीक्षा... (AR)
Posted on: Jun 25, 2020. Tags: CG RAJNANDGAON REKHA KANTRA SONG VICTIMS REGISTER
देशी धान की खेती करते हैं, खाद के लिये गोबर और पत्ते का उपयोग करते हैं...
ग्राम-बडेकुकनार, जिला-कोंडागांव (छत्तीसगढ़) से सुमंकर बघेल जो एक किसान हैं, खेती से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं, वे 30 साल से खेती कर रहे हैं, देशी धान की खेती करते हैं, खाद के लिये गोबर खाद और पेड़ो के पत्ते का उपयोग करते हैं, बाजार में उपलब्ध खाद उपयोग नहीं करते हैं, उनका कहना है कि बाजार उनके गाँव से दूर है तो खाद नहीं ला पाते हैं, इससे उन्हें शालभर के लिये पर्याप्त फसल मिल जाता है, अपने द्वारा उगाये फसल को वे नहीं बेचते हैं, खाने के लिये उपयोग करते हैं| (AR)
