Impact : मोहल्ले में पानी की समस्या थी, अब सुविधा हो गई है...
ग्राम-मोहली, ब्लाक-ओडगी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से ज्ञानचंद जयसवाल बता रहें हैं कि उनके मोहल्ले में पानी की बहुत समस्या थी, वहां की आबादी 100 से ज्यादा है आधा किलोमीटर दूर डोढी से पानी लाते थे| इसके लिए उन्होंने ग्रामसभा में आवेदन किया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा था| तब उन्होंने अपनी समस्या को 3 जून 2018 को सीजीनेट में अपनी समस्या को रिकॉर्ड कराया जिसके बाद अप्रैल 2019 में उनकी समस्या हल हो गई| इसलिये वे सीजीनेट के साथियों और संबंधित अधिकारियों को धन्यवाद दे रहे हैं| संपर्क नंबर@6260335807.
Posted on: Jul 01, 2019. Tags: CG GYANCHAND JAISWAL IMPACT STORY ODGI SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
कुदरगढ़ी झूले, झूले एही बनवा...भजन गीत-
जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से श्यमसाय पैकरा जो दिव्यांग है| सीजीनेट के साथियों को एक भजन सुना रहे हैं :
धन बाट धाम एकर इहबा करनावा-
कुदरगढ़ी झूले, झूले एही बनवा-
काहे के डोरी लागी, काहे के पलनवा-
काहे गमगमावत बाटे, बहत पवनवा-
कुदरगढ़ी झूले, झूले एही बनवा-
रेशम के डोरी लागे, चंदन पलनवा...
Posted on: Jun 27, 2019. Tags: CG SHYAMSAI PAIKARA SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती...कविता-
ग्राम पंचायत-खजूरी, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से राजू पैकरा एक कविता सुना रहे हैं :
लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती-
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती-
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है-
चढ़ती दीवारों पर सौ सौ बार फिसलती है-
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है-
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना नहीं अखरता है...
Posted on: Jun 18, 2019. Tags: CG POEM SHYAM SAI PAIKARA SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
नानी खाये पान लाल चूसे आमा खालसा...कविता-
ग्राम पंचायत-खजूरी, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से राजू पैकरा, संदीप पैकरा, धानू पैकरा और सुमित एक कविता सुना रहे हैं :
नानी खाये पान लाल चूसे आमा खालसा-
लड़की गाती बुईयाँ गाना-
रखे सरोता सुनते नना-
मनु का सुनो जोहर-
कमल खिले सुंदर हार-
Posted on: Jun 18, 2019. Tags: CG POEM SHYAM SAI PAIKARA SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
गर्मी घामे सोते जाये, घर दूरा पलट फेर नहीं पाये...कविता-
ग्राम-देवरी, तहसील, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलास सिंह पोया एक कविता सुना रहे हैं :
गर्मी घामे सोते जाये, घर दूरा पलट फेर नहीं पाये-
ज्येठ, बैसाख, गर्मी सोते जाये-
घर मंदिर अपने पलट नहीं पाये-
आवे सावन पानी बरसे, अषाढ़ में घुटुर घटर बादल कड़काय...
