जन्मे है राम रघुरय्या, अवधपुर बाजे बधाईया...भक्ति गीत
ग्राम-छुलकारी, पोस्ट-पसला, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से मन्दाकिनी मिश्रा एक भक्ति गीत सुना रही है:
जन्मे है राम रघुरय्या, अवधपुर बाजे बधाईया-
कौन के घर में जन्मे है राम जी,कौन के घर कन्हैया-
अवधपुर, बाजे बधाईया, जन्मे है राम रघुरय्या-
दशरथ के घर जन्मे, राम रघुरय्या,
देवकी के लाल कन्हैया,अवधपुर बाजे बधाईया-
क्या खाये श्रीराम रघुरय्या,क्या रे कन्हैया,अवधपुर बाजे बधाईया...
Posted on: Apr 09, 2018. Tags: MANDAKINI MISHRA SONG VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर: इमली का लाटा बनाने की घरेलू विधि...
इमली के लाटा धूप, गर्मी के दिनों लिए बहुत लाभदायक होता है, बुखार में अक्क्सर मुंह का स्वाद बदल जाता है तो इमली का लाटा खाने से फ़ायदा होता है. इसे घर में आसानी से बनाया जा सकता है: लाटा बनाने की सामग्री-सूखा इमली, गुड़, नमक सूखा मिर्च, खड़ा धनिया, हरी मिर्च एवं लाटा में लगाने के लिए एक पतला बास की लकड़ी. विधि- इमली को सील पत्थर (सील बत्ते) पर कुचलकर दाने अलग निकाल दे. फिर थोड़ा और कुचले, अब सूखा मिर्च के टुकड़े कर इमली में मिश्रण करे उसके बाद थोड़ा और कुचले अब स्वाद अनुसार खड़ा धनिया, हरी मिर्च, नमक, गुड़ बनाए हुए मिश्रण में डालकर अच्छा मिश्रण कर कुचल ले अब कूटे हुए लाटा मिश्रण के गोले को बास की लकड़ी लगा दे, अब लाटा बनकर पूरी तरह तैयार है| आप स्वाद ले सकते है.
Posted on: Apr 08, 2018. Tags: SARLA SHRIVAS SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER
मै जन्म ले सकूं, मुझे साँस तो मिले, तू भी तो देख मै हूँ, किस रूप में ढली...भ्रूण हत्या पर कविता
ग्राम-सिवनी, विकासखण्ड-मरवाही, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से कान्ता शर्मा भ्रूण हत्या के बारे में एक कविता सुना रहे है:
मै जन्म ले सकूं, मुझे साँस तो मिले-
ममता से तेरा मुख, एक बार तो खिले, तू भी तो देख मै हूँ, किस रूप में ढली-
माँ मत मसल मैं ही तेरी, बगिया की एक कली, ऐसा ही किया होता, जो माता तुम्हारी-
होती कहा बतावो अस्तित्व हमारी, तू भी तो आख़िर, माँ के आंचल तले पली-
सोचो कि क्या तेरी आत्मा धिक्कारती नही, क्यों तूने लाई जीवन सवारती नही-
क्या तेरे अन्तरात्मा में ना हो ख़लबली, माँ मत मसल मैं ही तेरी, बगिया की एक कली...
Posted on: Apr 07, 2018. Tags: KANTA SHRMA SONG VICTIMS REGISTER
है मेरा एक सोचना काश ऐसा हो जाए, मेरा देश फ़िर ऐसा सोच जैसा हो जाए...कविता
ग्राम-सिवनी, ब्लॉक-मरवाही, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से कान्ता प्रसाद शर्मा एक कविता सुना रहे है:
है मेरा एक सोचना काश ऐसा हो जाए-
मेरा देश फ़िर ऐसा सोच जैसा हो जाए-
देवता सरीखे पिता माँता हो, स्नेही भ्राता हो-
मिलनसार नाता हो, पुत्र सा जमाता हो-
प्रदूषित ना अन्न हो, शोषित ना मन हो-
आत्मा प्रसन्न हो, सभी लोग धन्य हो-
अच्छा प्रशासक हो, बुराई का नाशक हो-
धर्म का उपाशक हो, सत्य सदा भाषक हो-
शिक्षा में शिष्टाचार हो, आदर सत्कार हो...
Posted on: Apr 07, 2018. Tags: KANTA SHRMA SONG VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : महुए को हम आदिवासी कोदो कुटकी के साथ पीसकर दलिया बनाकर भी पीते है...
ग्राम-भुरियालदंड, तालुका-कोरची, जिला-गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) से दशरू कुमरे महुए का उपयोग किस-किस काम के लिए किया जाता है, उसके बारे में जानकारी दे रहे है वे बता रहे हैं कि मध्य भारत के आदिवासी इलाकों में महुआ का उपयोग खाने के साथ में भी किया जाता है और इसे कोदो कुटकी के साथ पीसकर दलिया बनाकर भी पीते है| इसको कंडे के साथ भुन्जकर भी खाया जाता है| महुआ का दारू भी बनाया जाता है इससे हमारा रोजगार भी चलता है| महुआ को गाय बैलो को भी खिलाते है उससे उनका शरीर तंदुरुस्त रहता है| इस तरह हमारे लिए और हमारे पशुओं के लिए बहुत उपयोगी है, यह हमारे संस्कृति का भी हिस्सा है | रानेश कोर्चा@8459328717.

