मै जन्म ले सकूं, मुझे साँस तो मिले, तू भी तो देख मै हूँ, किस रूप में ढली...भ्रूण हत्या पर कविता
ग्राम-सिवनी, विकासखण्ड-मरवाही, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से कान्ता शर्मा भ्रूण हत्या के बारे में एक कविता सुना रहे है:
मै जन्म ले सकूं, मुझे साँस तो मिले-
ममता से तेरा मुख, एक बार तो खिले, तू भी तो देख मै हूँ, किस रूप में ढली-
माँ मत मसल मैं ही तेरी, बगिया की एक कली, ऐसा ही किया होता, जो माता तुम्हारी-
होती कहा बतावो अस्तित्व हमारी, तू भी तो आख़िर, माँ के आंचल तले पली-
सोचो कि क्या तेरी आत्मा धिक्कारती नही, क्यों तूने लाई जीवन सवारती नही-
क्या तेरे अन्तरात्मा में ना हो ख़लबली, माँ मत मसल मैं ही तेरी, बगिया की एक कली...
