2005 सलवाजुडूम के समय डर के कारण आदिवासी जनता छत्तीसगढ़ से तेलंगाना गए हैं,
ग्राम-चिपुरपाड़,ब्लाक-कुख्लूर,जिला-एलूर गोदावरी (आंध्राप्रदेश) से रवामाड़ा बता रहे हैं कि आदिवासी जनता 2005 या 2006 के बीच सलवाजुडूम के डर के कारण छत्तीसगढ़ से तेलंगाना गए हैं|उनको अभी वहाँ रहने के लिए बहुत दिक्कत हो रहा हैं,क्योकि फ़ॉरेस्ट विभाग वाले उन्हें खेती करने नहीं दे रहे हैं,और गाँव से भागाने की कोशिश कर रहे हैं,उनको सरकार से कोई मदद नहीं मिली है| अधिक जानकारी के लिए इस नंबर पर बात कर सकते हैं|संपर्क नंबर@8179933802.
Posted on: Aug 13, 2021. Tags: (AANDHRAPRADESH) CHIRPUPAD ELOOR RAVAA MAADAA
सहकार रेडियो: विचार यात्रा कला, अहंकार और सत्य के बारे में – लियो टॉलस्टॉय-
प्रिय साथियो, ‘सहकार रेडियो’ का यह प्रयास सरकारों व कारपोरेट घरानों के दबाव से मुक्त रहकर लगातार चलता रहे, इसके लिए आपकी आर्थिक भागीदारी भी ज़रुरी है| श्रोताओं के लिए एक न्यूनतम (मासिक) सहयोग राशि तय की गई है| हमें लगता है कि सहयोग स्वरुप कम से कम इतनी ज़िम्मेदारी का निर्वहन तो आपको करना ही चाहिए| हांलाकि यह सहयोग अनिवार्य नहीं, स्वैच्छिक है| 25 रूपए प्रतिमाह की दर से आप अपनी समयावधि और सहयोग की राशि चुन सकते हैं|
https://www.sahkarradio.com/chart/vichar-yatra-leo-tolstoy-1/https://youtu.be/78E0_AS83vk
Posted on: Aug 13, 2021. Tags: SAHKAR RADIO
रे रे लोयो राला रेरेलोयो रला...गोंडी गीत-
ग्राम-पुसागाँव, पंचयात-पालकी, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से सोनारी, बसंती, मनी एक गोंडी गीत सुना रहे हैं :
रे रे लोयो राला रेरेलोयो रला-
रे रे लोयो रे रेला-
रेलो रेरेला रे रे लोयो
रला रे रे लोयो...
Posted on: Aug 12, 2021. Tags: CG GONDI MATRA NARAYANPUR SONG SUKHDAI
सहकार रेडियो: विचार यात्रा शिक्षा और मानवता के बारे में- ईश्वरचंद विद्यासागर
श्रोताओं, विचारों की यात्रा में आज आप सुनेंगे ईश्वरचंद विद्यासागर के विचार, जो कि मानवता के विकास और शिक्षा के बारे में हैं| आवाज़ है प्रभात दर्शी की|
कार्यक्रम की यूट्यूब लिंक:
https://youtu.be/q0m7KkYej6g
वेबसाइट पर सुनें: https://www.sahkarradio.com/chart/education-and-humanity-ishvarchand-vidyasagar/
Posted on: Aug 12, 2021. Tags: SAHKAR RADIO
भूखे-मजदूर-किसानों के लिए, वीर नारायण सिंह ने अपना खून बहाया था...कविता
भागीरथी वर्मा, रायपुर, छतीसगढ़ से हैं. छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अभी हाल ही में वीर नारायण सिंह का शहादत दिवस मनाया गया है. उसी सन्दर्भ में एक कविता का प्रस्तुत कर रहे हैं:
छतीसगढ़ के सोनाखान में, इंक़लाब का बिगुल बजाया था
भूखे-मजदूर-किसानों के लिए, वीर नारायण सिंह ने अपना खून बहाया था
सन 1856 के अकाल में
भूख से बिलखते, गरीब-किसानों के जीवन की रक्षा में
अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष चलाया था
छतीसगढ़ के सोनाखान में...
सोये हुए आदिवासियों को, उस वीर ने जगाया था
बेईमानों को ललकारा था
ऐ लुटेरे ! तू खाली हाथ आया है, अब खाली हाथ ही जाएगा
छतीसगढ़ के सोनाखान में...
जन आंदोलन देखकर, मक्कारों ने घबराया था
राजद्रोही बनाकर उस वीर को, जेल में ठूंसवाया था
जल्लाद अंग्रेज ने भी उस वीर के साथ, कैसा दुर्व्यवहार रचाया था
बीसों नाख़ून खींचकर, उँगलियों को लहू-लुहान बनाया था
छतीसगढ़ के सोनाखान में...
10-दिसंबर-1857 का, वह मनहूस दिन भी आया था
देश के गद्दारों ने जयस्तंभ चौक पे, उस वीर को फांसी पर लटकाया था
उस वीर के शहीद होने से, छत्तीसगढ़ के धरती में मातम सा पसराया था
छतीसगढ़ के सोनाखान में...
