आता है याद मुझको, गुजरा हुआ जमाना...ग़ज़ल-
सुनील कुमार उर्दू व फारसी के लोकप्रिय शायर, सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा के रचियता इकबाल साहब की ग़ज़ल सुना रहे है:
आता है याद मुझको, गुजरा हुआ जमाना-
वो बाग की बहारे, वो सबका चहचहान-
आज़ादीया कहा वो, अब अपने घोंसले की-
अपनी खुशी से आना, अपनी खुशी से जाना-
आता है याद मुझको, गुजरा हुआ जमाना-
लगती है चोट दिल पर, आता है याद जिस दम-
सब नम के आसूओं पर, कलियों का मुस्कुराना-
आता है याद मुझको, गुजरा हुआ जमाना...
Posted on: Apr 23, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
पृथ्वी दिवस: ऐसे ही छेड़खानी होती रही तो पृथ्वी से जीव जन्तु वनस्पति का खात्मा ही हो जायेगा...
पृथ्वी दिवस १९७० में पहली बार मनाया गया था, इसका उद्देश्य लोगो को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना था | पृथ्वी पर अक्सर उत्तरी ध्रुव पर कई किलोमीटर तक बर्फ पिघलने से सूर्य की पराबेगनी किरणों को रोकना वाली ओजोन परत में छेद होना सुनामी जैसे भयंकर प्राकृतिक आपदा होना इन सभी के लिए मनुष्य ही जिम्मेदार है, अगर ऐसे ही पृथ्वी के साथ छेड़खानी होती रही तो पृथ्वी से जीव जन्तु वनस्पति का खात्मा ही हो जायेगा | पृथ्वी दिवस मात्र मनाने का दिन नही है बल्कि यह दिन चिन्तन मनन का है कि कैसे प्राकृतिक आपदाओं से बचा जाए और पर्यावरण को कैसे बचाया जाए ताकि हम स्वस्थ रह सके तथा आने वाली पीढ़ी भी सुरक्षित रह सके. सुनील कुमार@9308571702
Posted on: Apr 22, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
धर्म तो एक ही सच्चा, जगत को प्यार देवें हम...प्रेम धर्म प्रार्थना-
मालीघाट, जिला-मुजफ्फपुर, (बिहार) से सुनील कुमार, एक प्रार्थना गीत सुना रहे है:-
धर्म तो एक ही सच्चा, जगत को प्यार देवें हम-
जगत में व जन जितने, जगत में दीन दलित जितने, उन्हें उपर उठाए हम-
धर्म तो एक ही सच्चा, जगत को प्यार देवें हम-
ना कोई विश्व में जिनका, दमन हो रहा जिनका-
उन्ही को शान्ति देवे हम, जगत को प्यार देवें हम-
धर्म तो एक ही सच्चा, जगत को प्यार देवें हम...
Posted on: Apr 22, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
टूटे हुए दिलो को मिलाकर तो देखिये...गजल -
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार प्रोफेसर शिरगातुल्ला हमीदी की एक गजल सुना रहे है :
टूटे हुए दिलो को मिलाकर तो देखिये-
इंसा के फासलों को घटाकर तो देखिये-
इंसानियत के दर्द जगाकर तो देखिये-
नफरत की आग खुद से बुझा कर तो देखिये...
Posted on: Apr 22, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
कम हो रही है चिड़िया, गुम हो रही है गिलहरियां, अब दिखती नही है तितलियां...कविता
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर, (बिहार) से सुनील कुमार साथी सुनील भाई की याद में राजेन्द्र राजेन्द्र की कविता विकास सुना रहे हैं – कम हो रही है चिड़िया, गुम हो रही है गिलहरिया-
अब दिखती नही है तितलिया, लुप्त हो रही है जाने कितनी, जीवन की प्रजातिया-
कम हो रहा है धरती के घड़े में जल, पौधो में रस, अन्न में स्वाद-
कम हो रही है फलों में मिठास, फूलो में खुशबु, शरीर में सेहत-
कम हो रहा है जमींन में उपजाऊ पन, हवा में आक्सीजन सबकुछ कम हो रहा है-
जो जरुरी है जीने के लिए मगर चुप रहो, विकास हो रहा है...


