राम चले वन को माता हम भी चले जायेंगे...गीत-
ग्राम-बटई, पोस्ट-रेवटी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से दुर्गेश पटेल एक कविता सुना रहे हैं :
राम चले वन को माता हम भी चले जायेंगे-
भूख लगेगा बेटा तो खाना कैसे पायेंगे-
पैर नंगे, फल-फूल खाते चले जायेंगें-
राम चले वन को माता हम भी चले जायेंगे-
प्यास लगेगा बेटा तो पानी कहां पाओगे...
Posted on: Mar 19, 2019. Tags: CG DURGESH PATEL SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
कोहरे की भरी सड़क पर बच्चे काम पर जा रहे हैं...कविता-
ग्राम-बटई, पोस्ट-रेवटी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से दुर्गेश पटेल एक कविता सुना रहे हैं :
कोहरे की भरी सड़क पर बच्चे काम पर जा रहे हैं-
सुबह-सुबह-
क्या अंतरिक्ष में गिर गई हैं, सारी गेंदे-
क्या दीमको ने खा लिया है सारी रंग बिरंगी किताबो को-
क्या काले पहाड़ के नीचे दब गये हैं सारे खिलौने-
Posted on: Mar 19, 2019. Tags: CG DURGESH PATEL POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
संभल-संभल के सीरी, झरथे धरती ऊपर...कविता-
ग्राम-बटई, पोस्ट-रेवटी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से दुर्गेश पटेल एक कविता सुना रहे हैं :
संभल-संभल के सीरी, झरथे धरती ऊपर-
टपकात गिरे पसीना, माथा छूथे छापर-
ध्यान चलत है चारो कोती, छिप गे काम-
छवांगे खेती-
छुगत ले आंखी मा आगे-
पाँव परत है, एती पेती...
Posted on: Mar 19, 2019. Tags: CG DURGESH PATEL POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
सुनले बापू ये पैगाम, मेरी चिट्ठी तेरे नाम...गीत-
ग्राम-बटई, पोस्ट-रेवटी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से दुर्गेश पटेल एक गीत सुना रहे हैं :
सुनले बापू ये पैगाम, मेरी चिट्ठी तेरे नाम-
चिट्ठी सबकी, सब में लिखता-
तुझको राम-राम-
सुनले बापू ये पैगाम, मेरी चिट्ठी तेरे नाम...
Posted on: Mar 19, 2019. Tags: CG DURGESH PATEL SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
किसी के बहकावे में न आकार सोच समझकर काम करना चाहिये...कहानी-
हिरन और सियार दोनों मित्र थे| दोनों एक सांथ कुएं पर पानी पीने के लिये जाते थे| दोनों एक दूसरे को सहारा देते हुवे पानी पीते हैं लेकिन सियार के मन में खोट होने के कारण वह हिरन को कुए में गिरा देता है| जिससे हिरन मर जाता है| उसी समय सियार आवाज लगता है जो हिरन को निकलेगा वो हिरन का सारा मांस खायेगा| वहीँ पास में कुछ किसान काम कर रहे होते हैं, वो आवाज को सुनकर आ जाते हैं| और हिरन को कुए से बाहर निकलकर उसका मॉस आपस में बाटने लगते हैं| तभी सियार अपना हिस्सा लेने आता है| तब किसान पूछते हैं| तुम यहां क्या कर रहे हो| हमने मेहनत से इसे निकला इस पर हमारा हक है| सियार ने कहा ठीक है| थोड़ा आग दे दो| किसानो उसे आग दिया और सियार ने उसे खेत में फेक दिया | किसानो के फसल जानने लगे तो सभी आग बुझाने के लिये भागे और सियार ने सारा मांस खा लिया | इस कहानी से सीख मिलती है कि किसी के बहकावे में न आकार सोच समझकर काम करना चाहिये|
