सावन की महीना पवन मारे झकझोर...व्यंग्य गीत-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडीयारी एक व्यंग्य गीत सुना रहे हैं :
सावन की महीना पवन मारे झकझोर-
जियरा मोरे डोले गांव शहर में चोर-
राम गजब आये ये बेशरम चोर-
पुलिस वाले भईया संभालो गांव शहर के बाग़ डोर-
तुम्ही हो खेवईया ना चले किसी का जोर-
सावन का महीना पवन मारे झकझोर...
Posted on: Aug 14, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH CHHATTISGARH SONG VICTIMS REGISTER
पेड़ो की झुरमुठों से आती है पैगाम...पेड़ पर कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी पेड़ो पर आधारित एक कविता सुना रहे हैं:
पेड़ो की झुरमुठों से आती है पैगाम-
मैं शांति की प्रतीक हूं उससे तुम महान-
तुमसे मैं नही मैं तो प्रकृति की देन हूँ-
पवन मुझे सुलाती है पवन मुझे उठाती है-
पवन के झोकों से बिखर कर अपने आप उगती हूँ-
मेघों को मैं ही बुलाकर जमकर बारिश कराती हूँ-
मुझसे भी ये ऊँचे-ऊँचे पर्वत में नदी नाला बनती हूँ...
Posted on: Aug 12, 2018. Tags: HINDI POEM KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
चम-चम बिजली चमके, काले-काले बदल छाया...सावन कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी वर्षा ऋतु पर एक कविता सुना रहे हैं :
चम-चम बिजली चमके काले-काले बादल छाया-
उमड़-घुमड़कर बादल गरजा, सुहानी वर्षा ऋतु आया-
मोतियाँ टपके पानी बनकर, टप-टपाकर धरती माँ को नहलाया-
हरित हुआ नवपल्लव से, विविध जीव जंतु जनम पाया-
दूल्हन जैसी कर नवश्रंगार सबके मन को पुलक कर निभाया-
चले किसान हल बैला लेकर, धरती माँ को खूब उकसाया...
Posted on: Aug 05, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
लाओ लाओ रे सखी, ले आओ तेल हल्दी पीस के...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडीयारी एक कविता सुना रहे हैं :
लाओ लाओ रे सखी, ले आओ तेल हल्दी पीस के-
बेटी जीवन की सगाई भयो-
लगन के ठाड़ भयो समधिन पठायो-
न्योता न्योती साजन देई आयो-
लल्लन ब्राम्हण देवता मिली वेदी बनायो-
लाओ लाओ रे सखी, ले आओ तेल हल्दी पीस के...
Posted on: Jul 31, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER
आओ साथियो मिल जुल कर कुछ करें...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडीयारी एक कविता सुना रहे हैं :
आओ साथियो मिल जुल कर कुछ करें-
अपने आस-पड़ोस को श्रमदान कर, खाली जगहों पर फलदार पौधे लगायें-
धरती कि सेवा माँ बाप की सेवा, होती है ईश्वर की सेवा-
उन सेवाओं से बड़ा न कोई जगत में, हुआ न कोई दूसरा सेवा-
अपने आस-पास कि सफाई कर एक फलदार वृक्ष लगायें-
वृक्ष लगाकर पुण्य कमायें वृक्ष होता महान-
वृक्ष से फल-फूल मिलता वृक्ष ही है भगवान...
