जा रे कही देबे चंदा...छत्तीसगढ़ी गीत
पतराज सिंह मरकाम, ग्राम पंचायत-कटरा, ब्लाक-मरवाही, जिला बिलासपुर छत्तीसगढ़ से छत्तीसगढ़ी भाषा में एक गीत सुना रहे हैं:
जा रे कही देबे चंदा-
जा रे कही देबे चंदा-
चदैनी कौन गले भोले-
नयन में सुरता झोले-
करोंदा वन मा भोले ओ...
Posted on: Aug 29, 2018. Tags: BILASPUR CG CHHATTISGARHI MARKAM PARTAJ SINGH SONG VICTIMS REGISTER
मकड़ी रानी, मकड़ी रानी मेरे घर तुम ना आना... बाल गीत
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैया लाल एक बाल गीत सुना रहे है:
मकड़ी रानी, मकड़ी रानी मेरे घर तुम ना आना-
मेरे घर आँगन में आकर जाला ना बनाना-
बड़ी महंगी पड़ती है तेरा आना जाना-
रोज रोज पड़ता है तेरा जाला गिराना-
बहुत डर लगता है तुम से मेरे घर में तुम्हारा रहना-
बच्चे भी डर जाते है पड़ता है उनको रोना-
जहर तुम फैलाती हो काम तुम्हारा घाव बनाना-
डॉक्टर के घर जाना पड़ता है, पैसा पड़ता है लुटाना-
मकड़ी रानी,मकड़ी रानी मेरे घर तुम ना आना !!
Posted on: Aug 29, 2018. Tags: CHHATTISGARH HINDI KANAHIYA LAL POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
नान पन के रानी नान पन के फुले हवे आज फूल बन के...ददरिया गीत
ग्राम-चंद्रेली, पोस्ट-मसगा, तहसील+थाना-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से राजकुमार आयाम एक ददरिया गीत सुना रहे है:
नान पन के रानी नान पन के फुले हवे आज फूल बन के-
तोर मोर माया फुलवारी रे माया देदे माया लेले संगवारी रे-
नान पन के रानी नान पन के फुले हवे आज फूल बन के-
डारा रें डारा जामुन के डारा रे तोर रूप दिखथे रानी-
तोर मोर माया फुलवारी रे माया देदे माया लेले संगवारी रे-
नान पन के रानी नान पन के फुले हवे आज फूल बन के...
Posted on: Aug 29, 2018. Tags: CHHATTISGARH DADARIA RAJKUMAR AYAM SONG SURAJPUR SURGUJIHA VICTIMS REGISTER
माँ पूजा की थाल है माँ ममता और प्यार...माता गीत -
ग्राम-बिहारपुर, जिला-सुरजपुर (छत्तीसगढ़) से मुकुंदलाल जैसवाल माता-पिता पर एक गीत सुना रहे है:
माँ पूजा की थाल है माँ ममता और प्यार-
रहती है माँ जब तलक जलते सदा की रात-
माँ पूजन का चाँद है पिता शरण के धूप-
दोनों के आशीष से जीवन ले नवरूप-
माँ थी घर में जब तलक जड़े रहे घर द्वार-
माँ के आंचल के तले एक रहा परिवार...
Posted on: Aug 29, 2018. Tags: CHHATTISGARH HINDI MUKUNDLAL JAISWAL SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
उत्तर दक्षिण पूरब पक्षिम, प्रमुख दिशाएं हैं चार, पर दसो दिशाओं में मचा हुआ है हाहाकार...कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे है:
उत्तर दक्षिण पूरब पक्षिम, प्रमुख दिशाएं हैं चार-
पर दसो दिशाओं में मचा हुआ है हाहाकार-
सुकून ढूंढने को निकला, सुकून तो दुनिया से है काफूर-
थका मांदा आशियाना आया तो देखा कलह का बजता नुपूर-
कानो को दबाकर वहां से निकला तो बाहर मारपीट अफरा तफरी-
उत्तर में गया नक्सलियों का दबदबा-
दक्षिण में गया तो आतंकवादियों का बोल बाला...
