पेड़ो की झुरमुठों से आती है पैगाम...पेड़ पर कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी पेड़ो पर आधारित एक कविता सुना रहे हैं:
पेड़ो की झुरमुठों से आती है पैगाम-
मैं शांति की प्रतीक हूं उससे तुम महान-
तुमसे मैं नही मैं तो प्रकृति की देन हूँ-
पवन मुझे सुलाती है पवन मुझे उठाती है-
पवन के झोकों से बिखर कर अपने आप उगती हूँ-
मेघों को मैं ही बुलाकर जमकर बारिश कराती हूँ-
मुझसे भी ये ऊँचे-ऊँचे पर्वत में नदी नाला बनती हूँ...
Posted on: Aug 12, 2018. Tags: HINDI POEM KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
आमा तरी सुतले आमली तरी गोड रे करेला झान तरी...कर्मा गीत
ग्राम-ओदारी परसापारा, पोस्ट-बरतीकला, थाना-चलगली, तहसील-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से चन्द्रसाय एक कर्मा गीत सुना रहें हैं:
आमा तरी सुतले आमली तरी गोड रे करेला झान तरी-
कईसन गे सावरो तुहर नींद गे करेला झान तरी-
गोड कर पायरी ला भेटल छेला छोर गे-
आमा तरी सुतले आमली तरी गोड रे करेला झान तरी-
कईसन गे सावरो तुहर नींद गे करेला झान तरी-
आमा तरी सुतले आमली तरी गोड रे करेला झान तरी...
Posted on: Aug 09, 2018. Tags: BALRAMPUR CHANDRASAI HINDI SONG SONG VICTIMS REGISTER
ये मोर सोना धरती ये मोर हीरा लखे धरती रे...छत्तीसगढ़ी गीत
ग्राम-खुरमा, पोस्ट-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से दिग्विजय सिंह एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
ये मोर सोना धरती ये मोर हीरा लखे धरती रे-
हरिहर चारो ओरी दिसे ना दिसे ना-
ये ही के छत्तीसगढ़ बोले ना बोले ना रे-
हरिहर चारो ओरी दिसे ना दिसे ना-
ये मोर सोना धरती ये मोर हीरा लखे धरती रे-
हरिहर चारो ओरी दिसे ना दिसे ना-
ये मोर सोना धरती ये मोर हीरा लखे धरती रे...
Posted on: Aug 09, 2018. Tags: CG DIGVIJAY SINGH HINDI SONG SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : बबूल (कीकर) के औषधीय गुण-
जिला-टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) से राघवेन्द्र सिंह राय आज हम लोगो को बबूल (कीकर) के औषधीय गुणों के बारे में बता रहे है, अतिसार (दस्त, पेचिस) में इसका पत्तियों के रस आधा चम्मच में एक चम्मच छाछ (मही) के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है, मुहं में छाले पड़ने पर बबूल के गोंद को मुंह में रखकर उसके रस चूसने से फायदा मिलता है, इसी तरह गले में सूजन आने से बबूल के छाल को 400 ग्राम पानी में उबाल लें, 100 ग्राम शेष रह जाए जिसमे क्वाक (काढा) शेष रहे उससे मुंह के गरारे करने से छाले जल्दी ठीक हो जाते है| गर्मी की अगर किसी को खांसी हो तो बबूल की पत्तियों को मुंह में रखकर चबाकर रस चूसने से और कंठ में उतार ले, तो इससे आराम मिलता है| राघवेन्द्र सिंह राय@9424759941.
Posted on: Aug 08, 2018. Tags: HINDI HEALTH RAGHVENDRA SINGH RAI SONG TIKAMGARH VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER
घुमड़ी रहे चलो घुट काली बादल घुमड़ी रहे रे...सावन गीत
ग्राम-सरईमाल, जिला-डिन्डोरी (मध्यप्रदेश) से संतोष कुमार आहिवार वर्षा ऋतु से सम्बंधित एक सावन गीत सुना रहे हैं:
घुमड़ी रहे चलो घुट काली बादल घुमड़ी रहे रे-
कौन खेती घुमड़े कौन बरसे काली बादल घुमड़ी रहे रे-
उत्तर दिशा गरजे पश्चिम दिशा बरसे रे हो-
पूर्ब दिशा बूंद ला चुहाये रे हो-
घुमड़ी रहे चलो घुट काली बादल घुमड़ी रहे रे...
