नइच करन संगी नौकरी हमन ...कविता
ग्राम-तमनार,जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं:
नइच करन संगी नौकरी हमन-
नौकरी कसन नीच कौनो नईये-
हमन नौकरी नइच करन-
खेती करबो पाती करबो-
करबो कौनो छोटे मोटे व्यापार-
पथरा कोडबो माटी कोडबो...(AR)
Posted on: Apr 30, 2021. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH
न रे सुअना घोंदरा ला छोंडी के कहाँ जाबो न...छत्तीसगढ़ी कविता
ग्राम-तमनार,जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे हैं:
न रे सुअना घोंदरा ला-
छोंडी के कहाँ जाबो न-
अपन घोंदरा के सुख ला-
सुघर जगह कहाँ पाबो न-
कोयला के खातिर भुइंया के-
पोटा पटी ला निकारी का रे सुअना...(AR)
Posted on: Apr 30, 2021. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो...भजन-
गुजरात से कन्हैया मलिक एक भजन सुना रहे हैं:
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो-
वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु-
कृपा कर अपनायो-
जन्म-जन्म के पूंजी पायो-
जग में सभी खोवायो-
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो...(AR)
Posted on: Mar 15, 2021. Tags: BHAJAN SONG GUJRAT KANHAIYA MALIK
दुनिया के कोने कोने में गूंज रहा यीशु का नाम...मसीह गीत-
जिला-जांजगीर चांपा (छत्तीसगढ़) से कृष्ण कन्हैया एक गीत सुना रहे हैं:
दुनिया के कोने कोने में-
गूंज रहा यीशु का नाम-
कितना प्यारा यीशु का नाम-
दुनिया में हाल यू लिया-
इस दिल के कोने कोने में-
गूंज रहा यीशु का नाम...(AR)
Posted on: Mar 15, 2021. Tags: CG CHAMPA JANJGIR KRISHN KANHAIYA
तुम्हारा मन व्याकुल न हो...छंद-
ग्राम-रनपोटा, पोस्ट-मरघटी, तहसील-मालखरोदा, जिला-जांजगीर (चापा) छत्तीसगढ़ से कृष्णा कन्हैया एक छंद सुना रहे हैं, तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो। थोमा ने उस से कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू हां जाता है तो मार्ग कैसे जानें? यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। (184127) GT
