क्यों इतना लाचार आदमी...कविता -

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार मुन्ना गुरु की रचना सुना रहे है:
क्यों इतना लाचार आदमी-
आज हुआ बेजार आदमी-
कितना नीचे और गिरेगा-
बिकने को तैयार आदमी-
पैरों तले जमीन नहीं है-
उड़ता पंख पसार आदमी-
मौत धड़ल्ले बाँट रहा है-
जीवन का हकदार आदमी-
काट रहा है अपनी ही जड़-
खुद लेकर तलवार आदमी...

Posted on: Jan 15, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

कभी तो इंडिया को भूलकर भारत की तस्वीर को देखो...कविता -

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार सुनील तेलामरी की रचना सुना रहे है:
कभी तो इंडिया को भूलकर भारत की तस्वीर को देखो-
कभी लाचार और बेबस के दिल में रोज उठती पीर को देखो-
यहां दो वक्त की रोटी की चिंता में गुजरते दिन-
गरीबी, भूख,महंगाई से जकड़ी जुल्म की जंजीर को देखो-
चलो ये माना हमने साइबर युग आ गया है-
मगर कोई बदल पाया नही, इंसान की तक़दीर को देखो-
तेरे ऊँचे महल ये शानो-शौकत इनके दम से है-
फनाह हो जाएगी ये सल्तनत है, आ में तासीर को देखो-
कभी तो इंडिया को भूलकर भारत की तस्वीर को देखो...

Posted on: Jan 14, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

सुबह जागिये, कह रही हैं हवाएं, मुझ जैसी न होती कोई भी दवाएं...कविता-

मालीघाट मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार महेश ठाकुर चकोर की एक रचना सुना रहे हैं जिसमे कहा गया है कि सुबह जागने से बहुत फायदा मिलता हैं:
सुबह जागिये कह रही हैं हवाए-
मुझ जैसी न होती कोई भी दवाएं-
सुबह जागिये कह रही हैं हवाए-
सूरज की किरणें बुलाने हैं आई-
विटामिन c देखो लुटाने हैं आई-
विटामिन c हड्डी को बलवान बनाये-
सुबह जागिये कह रही हैं हवाएं...

Posted on: Jan 13, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

लाज आँखिन से ओकरा ढरकिये गइल...भोजपुरी कविता -

सुनील कुमार संजय सिंह दीवान के साथ एक भोजपुरी रचना सुना रहे हैं:
लाज आँखिन से ओकरा ढरकिये गइल-
गाँठ पर गाँठ बान्हल सरकिये गइल-
उ कबो नाहीं तकलस चुहानी का ओर-
तबो संवचल सहेजल खरकिये गइल-
रंग पोतलस महीनन ले सउंसे बदन-
बीचे हंसन के कउआ बरकिये गइल-
भीत माटी के सजलस चनेसरी गज़ब-
सुनके धरती के आहट दरकिए गइल-
मन के बछरू के सजलस तबो ना सजल-
एगो छिउंकि चलल उ छरकिये गइल...

Posted on: Jan 13, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

लालबहादुर शास्त्री का पुण्य स्मरण...

आज़ादी की रक्षा केवल सैनिकों का काम नही है। इसके लिए पूरे देश को एक और मजबूत होना होगा। हम सभी को अपने-अपने क्षेत्र में उसी समर्पण, उसी उत्साह और उसी संकल्प के साथ काम करना होगा जो रणभूमि में एक योद्धा को प्रेरित और उत्साहित करती है। -लाल बहादुर शास्त्री
एक धर्मनिरपेक्ष, मजबूत भारत का सपना देखने वाले देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री पाकिस्तान पर निर्णायक विजय के बाद 11 जनवरी, 1966 को ताशकंद में रहस्यमय राजनीतिक षड्यंत्रों की बलि चढ़ गए थे। उनकी असामयिक मृत्यु की गुत्थी आज भी अनसुलझी है या अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के हवाले से जान-बूझकर अनसुलझी छोड़ दी गई है। देश के इस सबसे सरल, सबसे ईमानदार राजनेता की पुण्यतिथि पर कृतज्ञ राष्ट्र की भावभीनी श्रद्धांजलि...

Posted on: Jan 12, 2018. Tags: SUNIL KUMAR

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