लालबहादुर शास्त्री का पुण्य स्मरण...
आज़ादी की रक्षा केवल सैनिकों का काम नही है। इसके लिए पूरे देश को एक और मजबूत होना होगा। हम सभी को अपने-अपने क्षेत्र में उसी समर्पण, उसी उत्साह और उसी संकल्प के साथ काम करना होगा जो रणभूमि में एक योद्धा को प्रेरित और उत्साहित करती है। -लाल बहादुर शास्त्री
एक धर्मनिरपेक्ष, मजबूत भारत का सपना देखने वाले देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री पाकिस्तान पर निर्णायक विजय के बाद 11 जनवरी, 1966 को ताशकंद में रहस्यमय राजनीतिक षड्यंत्रों की बलि चढ़ गए थे। उनकी असामयिक मृत्यु की गुत्थी आज भी अनसुलझी है या अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के हवाले से जान-बूझकर अनसुलझी छोड़ दी गई है। देश के इस सबसे सरल, सबसे ईमानदार राजनेता की पुण्यतिथि पर कृतज्ञ राष्ट्र की भावभीनी श्रद्धांजलि...

