जल से पतला कौन है, कौन भूमि से भारी...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
जल से पतला कौन है, कौन भूमि से भारी-
कौन अगन से तेज है, कौन काजल से काली-
जल से पतला ज्ञान है, पाप भूमि से भारी-
क्रोध अगन से तेज है, कलंक काजल से काली-
मन भज ले श्री राधे गोविंदा...
Posted on: Mar 30, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGADH SONG VICTIMS REGISTER
अतिथी कला होई, सीता तो सीता सोई...ओड़िया भजन-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक ओड़िया गीत सुना रहे हैं :
अतिथी कला होई, सीता तो सीता सोई-
हे गणस्वामी मोरो, मृग मारी गा माई-
पोई का पोट्टा जाती, निये लम करा पोती-
कहिये करे मोरो, दहा नान पी-
नमो मोहरी सीता, श्री राम को ओ नीता...
Posted on: Mar 28, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
हम तो छोड़ जा रहे हैं दुनिया तुम्हारे हवाले करके सारे...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
हम तो छोड़ जा रहे हैं दुनिया तुम्हारे हवाले करके सारे-
हमें न भूलना संभालकर रखना, ऐ आने वाले इस धरती की शान-
यहां तो हर कोई मेहमान और आना जाना लगा है जमाना-
क्या लेके आया क्या लेके जाना, बस दो दिन का मेंहमान-
भाई चारे का सांथ निभाना, गिरे हुए को भी उठाना...
Posted on: Mar 27, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
पुती के बेरा उतरगे न गेरा, उठो-उठो भोजली दाई दर्शन के बेरा...भोजली गीत-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक भोजली गीत सुना रहे हैं :
पुती के बेरा, उतरगे न गेरा-
उठो-उठो भोजली दाई दर्शन के बेरा-
आहो देवी गंगा – एक बेट हर्दी ला घोटी-घोटी पीसेन-
हमरे भोजली दाई ला हंसी हंसी पिटेन...
Posted on: Mar 26, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
एक दूसरे का मदद करने से जीवन सरल हो जाता है...कहानी-
गंगा किनारे एक अंधा और एक गूंगा रहते थे| एक देख नहीं सकता था| दूसरा बोल नहीं सकता था| दोनों एक दूसरे की मदद कर साथ जीवन व्यतीत करते थे| गूंगा अंधे को राह दिखता था| अंधा द्वार-द्वार पर आवाज लगाकर भीख मांगता था| इस तरह से दोनों झोली लेकर भीख मांगते थे| लोग उनको भिक्षा देते थे | दोनों का घर नहीं था| वे प्रसाद खाकर मंदिर में ही पड़े रहते थे| साथ ही वे मंदिर की साफ़ सफाई भी कर लेते थे| इस तरह से उनका जीवन गुजर रहा था| उनकी बेबसी ने उन्हें संत बना दिया|
