अंगना मा भारत माता के, उचे बिहनिया ले चिरैया बोले...गीत-
खैरागढ़, राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से जया मुंडे एक गीत सुना रही हैं:
अंगना मा भारत माता के-
सोन के बिहनिया ले चिरैया बोले-
एक बरस में बारह महिना बारह सितम कुछ लागे-
संझा के बेरा ला का कहों संगी-
लाल कमल कस फूले-
अंगना मा भारत माता के-
उचे बिहनिया ले चिरैया बोले...
Posted on: Jan 25, 2020. Tags: CG JAYA MUNDE RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER
अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस...
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से वीरेंद्र गंधर्व अभिलाषा विद्यालय के शिक्षक बता रहे हैं अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस प्रतिवर्ष 24 जनवरी को पूरे विश्व में मनाई जाती है| संसार जिस प्रकार बालक का है उसी प्रकार बालिका का भी है क्योंकि दोनों से ही संसार चल रहा है, दोनों के बिना तो संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती है तो क्यों बालिका का सम्मान न हो, उस पर अन्याय और अत्याचार क्यों हो ये होना अत्यंत दुखदाई है वो भी मनुष्य है उसे भी मनुष्य का दर्जा देते हुए सम्मान करना चाहिए उसे भी आसमान छूने की अभिलाषा है |हर माता-पिता का कर्तव्य है इसे निभाने के लिए आज ही संकल्प लें और इसी तरह बालिकाओं का भी ध्यान रखें और आगे बढ़ने के लिये प्रोत्साहित करें |
Posted on: Jan 25, 2020. Tags: CG RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
अति भोजन हानिकारक है...दोहा-
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से वीरेंद्र गंधर्व दोहा सुना रहे हैं :
अति भोजन हानिकारक है-
हानिकारक है अति मिठास-
हानिकारक है अति निकटता-
हानिकारक है अति विश्वाश-
अति मीठा न बोलिये मन में लोभ सरकार होय-
चिकित्सा कही न हो सके आजीवन तू रोय-
पालिये घर में भले चाहे बिच्छू सांप...
Posted on: Jan 19, 2020. Tags: CG RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHRAV
कहां मेर होथे अचानकपुर गाँव...गीत-
खैरागढ़, जिला-राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से जया मुंडे एक गीत सुना रही हैं :
कहां मेर होथे अचानकपुर गाँव-
तोला पूछत आहूं रे-
मुंगेली शहर देवी गंगा के मेला घुमे ला अहूँ ओ-
थाना मुंगेली मोर जिला बिलासपुर-
अचानकपुर मोर गांव-
देवी चौरा पीपर के छईया-
सेवी मरन मोर नाव...
Posted on: Jan 18, 2020. Tags: CG JAYA MUNDE RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER
छेर छेरा त्यौहार की शुरुआत...कहानी-
जिला-राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से वीरेंद्र गंधर्व छेर छेरा त्यौहार के विषय में जानकारी दे रहे हैं, छेर छेरा पर्व की शुरुआत उस समय हुई थी, जब देश में अकाल की स्थिति हुई और बड़े जमीदार ने अन्न को अपने गोदाम में दबाकर रखते थे गरीबो को खाने को नहीं मिलता था, उस समय अकाल ने अमीरो की ही कमर तोड़ दी उन्हें कमजोर कर दिया, तब उन्हें सलाह दी गयी वे गरीबो को अन्न बांटे, तब उन्होंने अपने अन्न भंडार का द्वार गरीबो के लिये खोल दिया, तब से इस पर्व की शुरुआत हुई और तब सभी आमिर गरीब मिलकर इस पर्व को मानाने लगे और मिलजुलकर रहने लगे | इस तरह इस दिन सभी भेद भाव को मिटाकर घर घर अन्न मांगते है और मिलकर खाते हैं|
