हमर बुढा देवतला मनाये समाज में ख़ुशी छाये...सरना पूजन गीत
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया बता रहे हैं उनके इलाके में कोट्राही पडारी में 21 को सरना पूजन हैं, वहां का निमंत्रण दे रहे हैं और उसके बारे में एक गीत सुना रहे हैं:
हमर बुढा देवतला मनाये समाज में ख़ुशी छाये-
संगी रे समाज में ख़ुशी छाये-
पांच गोत्र सगा नियम ला बनाबो-
पांच कलश में दीप जलाबो-
हमर बुढा देवतला मनाबो...
शरण में बुढा देव देवतला मनाबो-
शम्भु गौरा, लिंगो, कुपार नियम बनाबो-
हमर बुढा देवतला मनाबो...
Posted on: Mar 01, 2018. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
आ गए है फागुन के त्यौहार, खेले भर गोरी आ जाबे रे...फागुन गीत
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक होली गीत सुना रहे है:
आ गए है फागुन के त्यौहार-
खेले भर गोरी आ जाबे रे-
खेले भर आबे हमर पारा रे-
संग ला पूछ ले और साथी ला उलारले-
करले तह बेक़रार-
खेले भर आबे हमर पारा रे...
Posted on: Feb 22, 2018. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
देखो गोंडवाना में गोंडी धर्म आये...गोंडवाना गीत
ग्राम-देवरी, ब्लॉक- प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश पोया एक गोंडवाना गीत सुना रहें है:
देखो गोंडवाना में गोंडी धर्म आये-
सबको जय सबको मुबारक-
अरे देखो गोंडवाना में गोंडी धर्म आये-
हंसी ख़ुशी हंसी ख़ुशी-
गोंडवाना लेंड के रहवोया-
जम के जय सेवा जम के मुबारक...
Posted on: Feb 21, 2018. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
महुआ कर फूल आमा भाजी कन्हैया सुग्घर लागथे रे...लोक गीत
जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) थाना-चंदोरा, ग्राम-देवरी से कैलाश सिंह पोया एक लोक गीत सुना रहे हैं:
महुआ कर फूल आमा भाजी कन्हैया सुगर लागथे रे-
महुआ कर कूची आमा फूल मुनगा कर सुन्दर लगाथे रे-
बादल घडर-घडर घुडकाये मुनगा कर फूल झर जाये रे-
फागुन के महीना फका-फाके महुआ हर हमर गिरथे रे...
Posted on: Feb 16, 2018. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
गली गली दारू पिया नशा हर घुमाए...नशा मुक्ति गीत
ग्राम-देवरी, जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़ से कैलाश सिह पोया एक नशा मुक्ति गीत गा रहे हैं :
गली गली दारू पिया नशा हर घुमाए – गली गली दारू पीके नशा हर घुमाए – रिश्ता नाता माई बाप सबो ला भुलाए – बात सुनो धमाका हरम खाए मार में – गेडा टूट जाए-
कूदत कूदत थाना मा पहुचे रिपोर्ट लिखाये-
छेरी मुर्गी बेच के पैसा पटाये – आबो तो समुझा रे भाई नशा छोड़ी – गली गली दारू पिया नशा हर घुमाए...
