शहर शहर घूम घूम के, गाँव-गाँव घूम घूम के, सीजीनेट वाले बता रहे कोयों को...सरगुजिया कविता...
ग्राम-नीलकंठपुर, पंचायत-कोरगी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से जगदेव प्रसाद पोया एक सरगुजिया कविता सुना रहे है:
शहर शहर घूम घूम के, डहर, डहर घूम घूम कर-
सीजीनेट वाले जगा रहे कोयों को-
गाँव-गाँव घूम घूम के, मोहल्ला मोहल्ला घूम घूम के-
सीजीनेट वाले बता रहे कोयों को-
मेरे साथी, मेरे साथी मेरे दोस्तों, मेरे दोस्तों-
धर्म अपने भूल गये, संस्कृति अपनी भूल गये-
सीजीनेट वाले याद दिला रहे कोयों को...
Posted on: Apr 08, 2018. Tags: JAGDEV PRASAD KOYA SONG VICTIMS REGISTER
रे रेला, रे रेला, रेला रे रेला रे रे, लोयो रे रेला रेला रे रेला...गोंडी गीत
बस्तर (छत्तीसगढ़) से विष्णु देव पद्दा गोंडी भाषा में एक गीत सुना रहे हैं :
रे रेला, रे रेला, रेला रे रेला-
रे रे लोयो रे रेला रेला रे रेला-
झिमिर-झिमिर, झिमिर-झिमिर पीर वयात-
वल्ले पीर वात कीचो उषा वाय ता-
गुडुम गुडुम नेक्ता काको बगा मंद का-
गुडुम गुडुम इंता काको बेगा मोके का-
पोर गुड-गुड यात नोना पांजत मकी काट...
Posted on: Apr 08, 2018. Tags: VISHNUDEV PADDA
गोंडी भाषा, गोंडी भाषा कोयतोरा...गोंडी कविता
जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से विष्णुदेव पद्दा एक गोंडी कविता सुना रहे है:
गोंडी भाषा, गोंडी भाषा कोयतोरा-
गोंडी भाषा कर्री इमा वायतोरा-
पेन मनता हानल मनता-
मा तल मनता मावा-
टोंडा मनता मंडा मनता-
कुंडा मनता मावा-
इदेन सेवा कीया निमा वायतोरा-
गोंडी भाषा, गोंडी भाषा कोयतोरा...
Posted on: Apr 08, 2018. Tags: SONG VICTIMS REGISTER VISHNU DEV PADDA GONDI
बीवी से डर लगता है, उसकी शेरनी जैसी गुर्राहट से, मै काँप जाता...व्यंग्य कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक व्यंग्य कविता सुना रहे है :
बीवी की फटकार से, चेहरा उतर गया-
बीवी की दहाड़ से मेरा, सारा बाल उखड़ गया-
मै डर से, खाट के नीचे, दुबक गया-
उसकी शेरनी जैसी गुर्राहट से, मैं काँप जाता-
जब वह झाड़ू लेकर चलती है तो,मै सहम कर रह जाता हूँ – उसकी पायल की झन्कार भी, हथौड़े जैसे लगती है-
उसकी चूड़ी की खनक भी, बन्दूक की गोली जैसे लगती है-
जब वह बल खाके चलती है तो, नागिन की चाल जैसा लगता है...
Posted on: Apr 08, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER
मध्यान्ह भोजन रसोईया संघ द्वारा लगातार 22 फरवरी से हड़ताल ज़ारी, पर कोई सुन नहीं रहा है...
ब्लॉक-अंतागढ़, जिला-कांकेर, उत्तर बस्तर (छत्तीसगढ़) से उत्तम आटला ज्ञानिकराम उईके से बात कर रहे हैं जो मध्यान्ह भोजन रसोईया संघ के उपाध्यक्ष है, वे बता रहे है, 22 फ़रवरी से लगातार रसोईया संघ के द्वारा हड़ताल जारी है. मांगे है जो व्यक्ति 2 अक्टूबर 1995 से सतत काम करता आया है जब से मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था शुरू हुई है, उसे सरकार द्वारा पद नियुक्त किया जाये, क्यूंकि 70-80 उम्र के लोगो के पास जीविका का कोई दूसरा साधन नहीं है, वर्षो तक सरकार के काम किया इसलिए पद नियुक्त कर रोज़गार दिया जाये. जो 2004 के रसोईया है उनके मानदेय में बढ़ोतरी की जाये इन्ही मांगों को लेकर अनिचित्कालिन हड़ताल पर है| जब तक मांगे पूरी नहीं होती हड़ताल जारी रहेगी.
