तेल संग हल्दी लगी, बजी ढोल मृदंग...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं|
तेल संग हल्दी लगी, बजी ढोल मृदंग-
सखी सहेली की ठिठोली, विवाह का ये उमंग-
सजधज कर आया दूल्हा राजा, मन में लिये नई उमंग-
सांथ बाराती गाजा बाजा, शरारत भरा हुड़दंग-
ब्राम्हण मंत्र पढ़ रहा, हुलहुली के संग-
शेहरा बांध भवर पड़ा, वर कन्या संग-संग...

Posted on: Apr 27, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

यहां ज्ञान अर्जन करने वाला कोई नहीं है...कहानी-

एक महात्मा बहुत दूर से कथा बांचने के लिये आये| वह प्रतिदिन लोगो को ज्ञान की बात बताता था| कुछ उसे ग्रहण करते थे| कुछ ध्यान नहीं देते थे| उसने सभी से बोला अपने घर में एक मुट्ठी चावल रखना| वह एक दिन तुम्हारे काम आयेगा| उसके बाद वह अपने स्थान को वापस चला गया| दूसरे वर्ष वह महात्मा पुनः उसी स्थान पर आया| वही श्रोता पुनः कथा सुनने गये| कथा शुरु करने से पहले महात्मा ने पूछा मैंने एक मुट्ठी चावल रखने के लिये बोला था| जिन्होंने चावल रखा था, वे खड़े होकर सामने आये| कोई सामने नहीं आया| उसने बोला फिर कथा सुनने का क्या फ़ायदा| तब एक बुजुर्ग महिला उठकर बोली| बेटा मैंने रखा है| लेकिन उठाकर ला नहीं सकी| मेरे साथ चलकर ले आना| महात्मा महिला के झोपड़ी में गया| तो देखा वहां कुछ नहीं था| उसने बोला माता झूठ क्यों बोली| महिला ने कहा| ये संसार भी झोपड़ा की तरह है| श्रोता ऐसे ही रहेंगे| महत्मा ने कथा बचना बंद कर दिया| वह समझ गया यहां ज्ञान अर्जन करने वाला कोई नहीं है|

Posted on: Apr 27, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGADH SONG STORY VICTIMS REGISTER

डाल-डाल पर पंछी बैठा डाल ही उनका घर...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुन रहे हैं :
डाल-डाल पर पंछी बैठा डाल ही उनका घर-
डाल में वे पंख पसारे, डाल ही सबसे सुंदर-
जड़ से उनको क्या लेना, जड़ तो मिट्टी के अंदर-
फिर भी जड़ मजबूत हो जड़ से ही डाली सुंदर-
जड़ यदि हो कमजोर तो सूख जायेगी डाली-
पेड़ यदि सूख मर जायेगी, तो क्यों डाले माली पानी...

Posted on: Apr 26, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

मछली जल में तैर रही थी, पड़ा व्याध की आंख...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
मछली जल में तैर रही थी, पड़ा व्याध की आंख-
मछली यह जान न पाई, लगी है जल में फास-
तैरने में वह मगन थी, पानी भी न था-
उसे क्या फर्क पड़ता चाहे हो पानी अथाह-
पानी की वह परी है, पानी उसकी है घर...

Posted on: Apr 26, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

मेरा उम्र हुआ 55 का चाल चलन है बचपन सा...रचना-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक रचना सुना रहे हैं :
मेरा उम्र हुआ 55 का चाल चलन है बचपन सा-
हरियाली सी प्रेम सदा एक सा-
तू जिंदगी में न करना कभी भी खेती एक सा-
धान बोओगे तो कोदो जागेगा-
लोहे की खेती तुझे खूब भायेगा-
और जब तू कोयले घोटाले में फंस जायेगा-
तो तेरा बाप भी तुझे न बचा पायेगा...

Posted on: Apr 25, 2019. Tags: CG COMPOSITION KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

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