हमें अच्छा व्योहार रखना चाहिये, और विवाद नहीं करना चाहिये...कहानी-
श्यामू नाम के किसान का एक बेटा था| जो पढ़ने लिखने में होशियार था| सभी उसे पसंद करते थे| कक्षा में उसके अच्छे परिणाम के कारण शिक्षक भी पसंद करते थे| वही एक दूसरा लड़का रामू भी रहता था| जो बड़े अफसर का बेटा था| वह श्यामू के बेटे को पसंद नहीं करता था| दोनों में फर्क था| एक अमीरी का दिखावा करता था| दूसरा शांत और सरल व्योहार करता था| एक दिन दोनों में बहस हो गई, और बात झगड़े तक आ गई| शयामू ने ये बात अपने पिता से बताई| उसके पिता अपने बेटे के बारे में जानते थे| इसलिये उन्होंने उसे डाटा और खुद के व्योहार में भी सुधार लाया|
Posted on: Apr 28, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG STORY VICTIMS REGISTER
सूनी हुई आज मायका, जहां बेटी की थी किलकारी...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
सूनी हुई आज मायका, जहां बेटी की थी किलकारी-
सखी सहेली छोड़ी बेटी, सूनी हुई घर महतारी-
लगन लगी वेदी सजी, हुई विवाह की भारी तैयारी-
जगमग-जगमग जगमगा उठा, मडवा-
मेहमानों का भीड़ था भरी...
Posted on: Apr 27, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
आँखों को जो भा जाये वही सुंदर, दिल तो एक मदारी का बंदर...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
आँखों को जो भा जाये वही सुंदर-
दिल तो एक मदारी का बंदर-
उसे क्या पता है ये समुंदर-
वह तो रहता शरीर के अंदर-
फिर भी कुछ-कुछ ताड़ जाता है-
आँखों को कुछ समझाता है...
Posted on: Apr 27, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
नटखट पंछी पिंजरे में है बंद, नहीं उड़ सकता स्वछंद...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
नटखट पंछी पिंजरे में है बंद-
नहीं उड़ सकता स्वछंद फिर भी-
करवा डालता लंथन-
जिसका पता है वह धंन-
एक दिन पिंजड़ा से उड़ जाता है-
स्वछंद उडाता रहता है...
Posted on: Apr 27, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
तेल संग हल्दी लगी, बजी ढोल मृदंग...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं|
तेल संग हल्दी लगी, बजी ढोल मृदंग-
सखी सहेली की ठिठोली, विवाह का ये उमंग-
सजधज कर आया दूल्हा राजा, मन में लिये नई उमंग-
सांथ बाराती गाजा बाजा, शरारत भरा हुड़दंग-
ब्राम्हण मंत्र पढ़ रहा, हुलहुली के संग-
शेहरा बांध भवर पड़ा, वर कन्या संग-संग...
