इंसान को प्रकृति का नुकसान नहीं करना चाहिये...
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से नम्र सिंह ठाकुर सभी नवरात्रि पर्व की बधाई देते हुये संदेश दे रहे हैं कि इस संसार में सबसे समझदार और बुद्धिमान प्राणी मानव को माना गया है इसलिये हमें किसी जीव को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिये, आज इंसानों हर जगह बिल्डिंग बना लिये हैं, सड़के बना डाली है अपनी जनसँख्या बढाई है लेकिन इस भूमि पर हमारे साथ जिन जीवों का अधिकार है उनके लिये कुछ नहीं छोड़ा है, घास के मैदान, वन सब नष्ट कर दिये हैं ये हमारी बुद्धिमानी का प्रतीक नहीं है ईश्वर ने हमें इतना योग्य बनाया है तो हमें इस संसार की रक्षा करनी चाहिये और जीवों को भी नुकसान नहीं पहुँचाना चाइये|
Posted on: Mar 25, 2020. Tags: CG NAMR SINGH THAKUR RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER
तुझसे त्रस है विश्व सारा...कविता-
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक कविता सुना रहे हैं:
तुझसे त्रस है विश्व सारा-
तू तो है कोरोना सबका हत्यारा-
बंद कराये विद्यालय बंद कराये दुकाने-
और क्या क्या गुल खिलायेगा न जाने-
हम सब आपस में मिलकर-
तुझे चित्त करेंगे सारे खाने-
संकल्प लिया है सर्व हारा-
तुझसे पायेंगे छुटकारा...
Posted on: Mar 25, 2020. Tags: CG POEM RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
घर में भूंजी भांग नहीं सुलताना मांगे जाय...कहावत-
जिला-राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से वीरेन्द्र गंधर्व कहावत के माध्यम से संदेश दे रहे हैं,
“घर में भूंजी भांग नहीं सुलताना मांगे जाय” अर्थात घर में पैसो की तंगी है और बाहर पैसो का दुरुपयोग हो रहा है, आज के समय में कुछ ऐसा ही हो रहा है, बच्चे घर की स्थिती को समझते नहीं हैं और पैसे लेकर फिजूल खर्च करते हैं|
Posted on: Mar 25, 2020. Tags: CG RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
राम लखन बोये हे जवारा हो...जस गीत-
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से जाया मुंडे एक जस गीत सुना रही हैं:
राम लखन बोये हे जवारा हो-
मातेश्वरी तोर भुवन मा-
दुर्गा दायी तोर भुवन मा-
महामाई तोर भुवन मा-
तीन लोक में गूंजे जैकारा ओ-
मातेश्वरी तोर भुवन मा-
राम लखन बोये हे जवारा हो...
Posted on: Mar 24, 2020. Tags: CG JAYA MUNDE RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER
गंगा के पानी अटाय नहीं ओ-
ग्राम-खैरागढ, जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से जया मुंडे एक जस गीत सुना रही हैं:
गंगा के पानी अटाय नहीं ओ-
कैसे माता तोरे ममता सिराये नहीं ओ-
ऐसे दुनिया मा कौन हा पाये नहीं ओ-
कैसे माता तोरे ममता सिराये नहीं ओ-
घट घट मा माता तैहीहां बसे ओ-
मोर माया के जाल मा जबेहा फसे ओ...
