हमारे गाँव में ज्यादा लोग छत्तीसगढ़ी बोलते हैं पर हमलोग मातृभाषा गोंडी को बचाकर रखना चाहते हैं...
ग्राम-भुरभुसी, पंचायत-जबेली, तहसील-पखांजूर, ब्लाक-कोयलीबेडा, जिला उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से रैनूराम कोला और सालेकराम टोप्पो सीजीनेट के अमर मरावी को उनके गाँव में बोले जाने वाले भाषाओं के बारे में बता रहे है कि वहां के आदिवासी गोंडी भाषा में बहुत कम बोलते है छत्तीसगढ़ी भाषा में ज्यादा बातचीत करते है और घर में अपने परिवार के साथ गोंडी भाषा में बात करते हैं जो आदिवासियों की मातृभाषा है |उस भाषा को भूलते जा रहे है अब धीरे-धीरे मातृ भाषा लुप्त होते जा रही है| लेकिन अब आदिवासी लोग अपनी भाषा को बचाकर रखना चाहते है| उनके गाँव में सीजीनेट की यात्रा पहली बार गया हुआ था| वहां के लोगो को बहुत अच्छा लगा |
Posted on: Sep 06, 2018. Tags: CG KANKER LANGUAGE PAKHANJUR RAINURAM KOLA SALEKRAM TOPPO SONG VICTIMS REGISTER
स्वास्थ्य स्वर: बिच्छू के काटने पर बचने का घरेलू उपाय
जिला-सागर (मध्यप्रदेश) से अनंतराम श्रीमाली बरसात के मौसम में बिच्छू के काटने से शरीर में विष के प्रभाव को कम करने की एक औषधि (घरेलू उपचार) बता रहे है, वे कह रहे हैं कि जिस जगह बिच्छू काटता है उस जगह अपामार्ग की जड़ (लट जीरा की जड़) को पीसकर उस स्थान पर लगा दो ,पाँच ग्राम सेंधा नमक (लाहोरी नमक) 25 ग्राम पानी में घोल कर सलाई द्वारा, जिसको बिच्छू ने काटा है उसकी आँख में सलाई से डाल दे विष उतर जायेगा, दो ग्राम नमक और दस ग्राम पानी का घोल बना कर आंख में डालने से भी विष उतर जायेगा, कोई भी बिच्छु का विष हो. संपर्क@8462970635.
Posted on: Sep 06, 2018. Tags: ANANTRAM SHRIMALI HEALTH MP SAGAR SONG SWASTHYA SWARA VICTIMS REGISTER
स्वास्थ्य स्वर: आँख की समस्याओं का घरेलू उपचार
ग्राम-घोंघा, थाना-बोड्ला, तहसील-बोड्ला, जिला कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से वैद्य भगत राम लांझी आज हम सभी को आँख की सामान्य समस्याओं का घरेलू उपचार बता रहे हैं:
आँख में खुजली होना, आँख जलन करना, आँखों से आंसू आता है तो उसके लिए धनिया, बड़ा वाला(देशी धनिया) खड़े धनिया को मिटटी के बर्तन में कम से कम 10-20 मिनट तक उबाल लें और 3 बार से छान ले उसी पानी से आँख को दिन में 2 बार छीटा मारकर धोना हैं इससे आँख में खुजली होना, आँख जलन करना, आँखों से आंसू आना ठीक हो जाता हैं | सम्पर्क नम्बर @7389964276
Posted on: Sep 06, 2018. Tags: BHAGATRAM LANJHI BODLA CG HEALTH KABIRDHAM SONG SWASTHYA SWARA VICTIMS REGISTER
हमारे गाँव का नाम रेंगावाही कैसे पड़ा : एक गाँव की कहानी (गोंडी भाषा में)
सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा आज ग्राम-रेंगावाही, ब्लाक-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां मोहन यादव की मुलाक़ात गाँव के बुजुर्ग गांडूराम धुर्वा से हुई है जो उनको उनके गाँव का नाम रेंगावाही कैसे पड़ा उसके बारे में गोंडी भाषा में बता रहे है वे कह रहे हैं कि पहले के ज़माने में उनके गाँव में बहुत ज्यादा रेंगा (बेर) के पेड़ हुआ करते थे जिसको काटकर यह गाँव बसाया गया है उसी के कारण उनके गाँव का नाम रेंगावाही पड़ा | उनको यह जानकारी उनके दादी दादा के माध्यम से पता चला ऐसा वे बता रहे है|
Posted on: Sep 06, 2018. Tags: CG GANDURAM DHURVA GONDI KANKER KOELIBEDA
पर्यावरण और वृक्ष हमारे वातावरण के मूल तंत्र है, उनकी देखभाल हम सब को मिलकर करना चाहिए...
दयाराम देवांगन, ग्राम पंचायत-कपिलदेवपुरी, तहसील और जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से बता रहे है कि पर्यावरण और वृक्ष हमारे वातावरण के मूल तंत्र है, उसके बिना हम नहीं रह सकते | जैसे साइकिल एक चक्के से नहीं चलती वैसे ही हमारा पर्यावरण भी एक दूसरे से संबंध बनाये हुए है| पहले की तुलना में पेड़ पौधे बहुत कम है जंगल धीरे-धीरे हम काटते जा रहे है इसको नहीं रोका गया तो आने वाले समय में बहुत दिक्कत हो सकता है इसलिए हर व्यक्ति एक पेड़ जरुर लगाये उसकी देखभाल करे गाँव के सरपंच की तरह नहीं की बारिश के मौसम में पेड़ लगवाए और गर्मीं तक वो सूख जाये| खासकर पेड़ों में कोई भेद न करें की कोई पेड़ फलदार नहीं है तो नहीं लगायेगें ऐसा नहीं सोचना है | सभी पेड़ पर्यावरण के लिए उपयोगी है |
