फुलों सी वो नाजुक है, वदन उसका रुई सामान...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
फुलों सी वो नाजुक है,
वदन उसका रुई सामान,
फिर भी ऊँचे पर्वत को चढ़ जाती,
वो नन्ही सी जान,
पर्वतो से टकरा कर, अपना वो बिल बनाती,
फुर्ती रहती हरदम, कहाँ कहाँ क्या मीठा...
Posted on: May 14, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
कल-कल, छल-छल बहती नदी नालायें...कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
कल-कल, छल-छल बहती नदी नालायें-
कहीं उथली, कही गहरी-
कहीं समतलतायें-
कई तरह की जीव जंतू, उसके अंदर समायें-
सभी का प्यास बुझाती वह अपना जल पिलाकर-
सभी उसका आगे में रहते, ठण्डा पानी पीकर...
Posted on: May 13, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
बार-बार बिजली चमकी, कड़का बादल घोर घार...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
बार-बार बिजली चमकी, कड़का बादल घोर घार-
झूम के बरखा रानी आयी, हुआ बूंदो का बौछार-
चम-चम, चम-चम चमक रही थी, था बादल में घोर अंधकार-
बादल से बादल टकरा रहा, गिरा बनकर मूसला धार-
धरती पास बुला रही थी, आँखों में ले कर प्यार-
प्यार दुलार धरती की, दिया अपना मुसली धार...
Posted on: May 13, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
आगे की सोचकर चिंता नहीं करनी चाहिये, समय के साथ सब अच्छा होता है...कहानी-
एक दिन कि बात है| दीनू नाम का एक किसान खेत से आकर घर के बाहर अकेला उदास बैठा था| खेत मे बीज डालने, बियासी, निदाई अदि का काम कर चुका था| लेकिन फसल पकने से पहले ही वर्षा रुक गई थी| भूमि में थोड़ी नमी बची थी| फसल खराब होने के आसार थे| इसलिये वह दुखी था| तभी उसका साथी रामू उसके पास आया| उसने दीनू से उसके दुःख का कारण पूछा| दीनू ने सब बताया| रामू बोला चिंता छोडो सब ऊपर वाले पर छोड़ दो| अभी बरसात का समय बचा है| चलो चाय पिलाओ| कुछ देर बाद जोर की बारिश होने लगी| ये देखकर दोनों खुश हो गये| और बोले भगवान ने हमारी सुन ली| इस कहानी से यह सीख मिलती है| परेशानियों से घबराना नहीं चाहिये, समय के साथ सब अच्छा हो जाता है|
Posted on: May 13, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG STORY VICTIMS REGISTER
ना होश रहा ना जोश रहा, आँखों से गया नींद...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
ना होश रहा ना जोश रहा, आँखों से गया नींद-
सारा रात बिता रहा, तारे रहता गिन-
भूख गया, प्यास गया, देख तन की सितलाई-
आँखों के आगे झूल रहा था, बुढ़ापा की परछाई-
हरदम याद आता रहता, बीती पलों की याद-
घुट कर रह जाता, करके उस पलों की याद...
