भेडिया और शहीद बकरी...कहानी-
हरे भरे पहाड़ पर बकरिया जब चरने जाती थी| तो उसमे से एक बकरी हमेशा कम हो जाती थी| भेडिये की इस हरकत से तंग आकार चरवाहे ने वहां बकरियां चराना बंद कर दिया| बकरियों ने मौत के डर से बाड़े में रहकर चरना उचित समझा | लेकिन उसमे से एक बकरी को बाड़े में कैद रहना पसंद नहीं आया| उसने सोचा अत्याचारी से कब तक बचा जा सकता है| भेड़िया किसी दिन पहाड़ी से उतरकर बाड़े में भी कूद सकता है| साथियों ने उसे समझाने का प्रयास किया| लेकिन वह मौका पाकर पहाड़ी पर चली गई| और भेडिये को खोजने लगी| काफी समय बाद उसे भेड़िया शिकार के लिये आता दिखा| वह समझ गई| उसे क्या करना है|
Posted on: Jun 08, 2019. Tags: CG KABIRDHAM OMKAR MARKAM SONG STORY VICTIMS REGISTER
मातरं पितरं तस्मात् सर्वयत्नेन पूजयेत्...संस्कृत वंदना
ग्राम-सिंगपुर, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम, (छतीसगढ़) से ओमकार सिंह मरकाम संस्कृत में वंदना सुना रहे हैं:
सर्वतीर्थमयी माता सर्वदेवमय: पिता-
मातरं पितरं तस्मात् सर्वयत्नेन पूजयेत्-
ओमकार बिंदु संयुक्तं नित्य ध्यान्ति हेगिम्न-
कम्द्द्य मोक्षय श्राव ओमकार-
नमो नमह वासु देव्सुकतम...
Posted on: May 24, 2019. Tags: CG KABIRDHAM OMKARSINGH MARKAM PANDARIYA SONG VICTIMS REGISTER
वर्षा बहार सबके मन को लुभा रही है...कविता
ग्राम- सिंहपुर तरहसील- पंडरिया जिला- कबीरधाम(छत्तीसगढ़) से ओमकार मरकाम एक कविता सुना रहे है|
वर्षा बहार सबके मन को लुभा रही है,
मघ में छटा अनूठी घनघोर छा रही है,
बिजली चमक रही है,
बादल गरज रहें है,
पानी बरश रहा है,
झरने भी बह रहें है,...
Posted on: May 21, 2019. Tags: CG KABIRDHAM OMKAR MARKAM POEM SONG VICTIMS REGISTER
हे नव भारत के करुण वीर झन भूलव अपन पुरुषार्थ...कविता
ग्राम-सिंगपुर,तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम, (छत्तीसगढ़) से ओमकार मारकाम एक कविता सुना रहा है:
भारत बन जाहि नन्द नवन-
उधर कवि कोदूराम दलित-
हे नव भारत के करुण वीर-
हे भीम भागरी के महावीर-
झन भूलव अपन पुरुषार्थ बर...
Posted on: May 21, 2019. Tags: CG KABIRDHAM MARKAM OMKAR PANDARIYA SONG VICTIMS REGISTER
सब में तू मीत है सब तुझमे निहित है...कविता
ग्राम-सिंगपुर, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम, (छत्तीसगढ़) से ओमकार सिंह मरकाम एक कविता सुना रहे हैं:
समंदर की लहरें सुनहरी रे श्रद्धा नन्द तीर्थ यात्रा-
रामेश्वरम् दीप सिखा छोटी साड़ी दुनिया-
सब में तू मीत है सब तुझमे निहित है-
तेरी बाहीं में पला मै मेरी कायनात रही तू-
जब छिड़ा युद्ध छोटा सा मै-
जीवन बना था चुनौती जिन्दगी...
