मै उपजाऊ हूँ पर तुम्ही बंजर बना रहे हो...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
मै उपजाऊ हूँ पर तुम्ही बंजर बना रहे हो-
अनेको प्रकार के रासायनिक खाद डालकर, मेरे सीने को छलनी किए जा रहे हो-
मै समतल हूँ मुझे खोदकर, उबड़ खाबड़ दुर्गम किए जा रहे हो-
मेरे भीतर रासायनिक पदार्थ निकालकर मेरे पेट फाड़े जा रहे हो-
मेरे ऊँचे-ऊँचे पेड़ पौधो को काटकर, मुझे विनाश किए जा रहे हो-
मै निर्जीव नही हूँ मै तो सजीव हूँ-
इसीलिए तो मै भिन्न-भिन्न वस्तुएं अन्न पैदा करती हूँ...
Posted on: Aug 15, 2018. Tags: KANHIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH CHHATTISGARH SONG VICTIMS REGISTER
तिरंगे के तीन रंगों को मैंने देखा बार-बार...राष्ट्रभक्ति कविता-
सेतगंगा, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से वैद्य रमाकांत सोनी एक कविता सुना रहे हैं :
तिरंगे के तीन रंगों को मैंने देखा बार-बार-
तीन रंगों में ब्रम्हा, विष्णु, महेश दिखाई देते हैं-
तीन रंगों में मुझे सत्य,अहिंसा, ज्ञान, आनंद दिखाई देते हैं-
तीन रंगों में मुझे ज्ञान, भक्ति, योग दिखाई देते हैं-
तीन रंगों में मुझे स्वास्थ्य, शिक्षा और धर्म दिखाई देते हैं-
तीन रंगों में की छटा में मुझे बाबू, वल्लभ, आजाद दिखाई देते हैं-
तीन रंगों की बहार ज्ञानेश्वर, तुमराम, नामदेव की याद दिलाती है...
Posted on: Aug 14, 2018. Tags: MUNGELI CHHATTISGARH POEM RAMAKANT SONI SONG VICTIMS REGISTER
इंसान से नफरत करते हो, भगवान को तुम क्या पाओगे...कविता-
ग्राम-रिमारी, जिला-सीधी (मध्यप्रदेश) से लालजी वैश्य एक कविता सुना रहे हैं :
इंसान से नफरत करते हो भगवान को तुम क्या पाओगे-
इंसान को तुन अपना ना सके भगवान को क्या पाओगे-
इंसान प्रभु का बंदा है नफरत ही नरक का फंदा है-
इन्सान को धोखा देकर के भगवान को तुम झुठलाओगे-
इंसान की इज्जत करना ही भगवान की पूजा होती है-
इंसान को अपमानित करते, प्रभु को न मान दे पाओगे-
खुद अपने दोष छुपाते हो, औरो को दोष लगाते हो...
Posted on: Aug 13, 2018. Tags: LALJI VAISHYA POEM SIDHI MADHYA PRADESH SONG VICTIMS REGISTER
पेड़ो के झुरमुटो से आती है पैगाम, मैं शांति की प्रतीक हूँ मुझसे ही तुम महान...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
पेड़ो के झुरमुटो से आती है पैगाम-
मैं शांति की प्रतीक हूँ मुझसे ही तुम महान-
मुझसे तुम हो महान, तुमसे मै नही-
मै तो प्रकृति की देन हूँ,
पवन मुझे उबलाती है, पवन मुझे उठाती है-
पवन के झोको से बिखरकर, अपने आप उग आती हूँ...
Posted on: Aug 13, 2018. Tags: KANHIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH CHHATTISGARH SONG VICTIMS REGISTER
पेड़ो की झुरमुठों से आती है पैगाम...पेड़ पर कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी पेड़ो पर आधारित एक कविता सुना रहे हैं:
पेड़ो की झुरमुठों से आती है पैगाम-
मैं शांति की प्रतीक हूं उससे तुम महान-
तुमसे मैं नही मैं तो प्रकृति की देन हूँ-
पवन मुझे सुलाती है पवन मुझे उठाती है-
पवन के झोकों से बिखर कर अपने आप उगती हूँ-
मेघों को मैं ही बुलाकर जमकर बारिश कराती हूँ-
मुझसे भी ये ऊँचे-ऊँचे पर्वत में नदी नाला बनती हूँ...
