कल रात कबीर मेरे घर में आया...कविता-
सेत गंगा, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से वैद्य रमाकांत सोनी एक कविता सुना रहे है:
कल रात कबीर मेरे घर में आया-
एक छोटा पुष्प मुझे देते हुए कहने लगा – इस पुष्प को मैं तुम्हे सौंपता हूँ-
पुष्प की याद भक्ति,राम रूपी खाद रहिम रूपी जल से-
इस कारण मै तुम्हारे पास लाया हूँ-
कलयुग की दुर्गन्ध से मुक्त करने के लिए-
भारत माता के जूड़े में सजाने के लिए-
इसके मानवता वादी सुगंध के लिए-
कलयुग में तुम्हारे सहारे के लिए...
Posted on: Aug 19, 2018. Tags: HINDI POEM MUNGELI CG RAMAKANT SONI SONG VICTIMS REGISTER
नेताओं की गोद में खेल रहा भारत महान...व्यंग्य कविता
कन्हैयालाल पड़ीयारी, ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से एक राजनैतिक व्यंग्य कविता सुना रहे हैं :
नेताओं की गोद में खेल रहा भारत महान-
जनता मूर्ख देख कर भी कर रहा उनका सम्मान-
खून की होली खेल रहे हो रहा कत्लेआम-
चीर हरण हो रहे यहाँ देखो खुले आम ....
Posted on: Aug 19, 2018. Tags: HINDI POEM KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH CG SONG VICTIMS REGISTER
किसीम-किसीम के नवा-नवा धान आगे, ओला खाके गवाबो प्राण...छत्तीसगढ़ी कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक कविता सुना रहे है:
किसीन-किसीन के नवा-नवा धान आगे ओला खाके गवाबो प्राण-
सचाई गुरमटिया बाशा भोर कि जमो ला लागिस रोग-
दुबराज भाढा दुबराज लक्ष्मी येमन ला छोड़ीन आज के लोग-
सफरी भाढा सफरी जो फुल ओला हम गहन भूल-
तुलसी फुल तुलसी मंजरी गुरमटिया ओहर कहा चल गिस यार-
बुढा बूढी कूड़ा खीरा साग ओला होगिस मलेरिया बुखार-
किसीन-किसीन के नवा-नवा धान आगे ओला खाके गवाबो प्राण...
Posted on: Aug 18, 2018. Tags: CHHATTISGARHI POEM KANHAIYALAL PADHIYARI RAIGARH CG SONG VICTIMS REGISTER
सावधान हो देशवासियों संसद आज हमारी...कविता
ग्राम-सिवनी, तहसील-मरवाही, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से कामता शर्मा एक कविता सुना रहे है:
सावधान हो देशवासियों संसद आज हमारी-
नेताओ की समर भूमि बन गई देश लो भारी-
एक से बढ़कर एक धुरन्दर यहाँ पाप की भोगी-
डसनी कस कर रहे माफिया सरकारी अभियोगी-
अपराधी लमपट गवार से इक्षाचारी खड़ेयत्री-
धन लो कपटी कामी बन गये देश के मंत्री...
Posted on: Aug 18, 2018. Tags: BILASPUR CG HINDI POEM KAMATA SHARMA SONG VICTIMS REGISTER
नारा किसी का काटिए करो ना इसमे भेद...गोंडवाना संस्कृति कविता-
ग्राम-धुमाडांड, पोस्ट-गोविंदपुर, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से होलसाय जगते गोंड आदिवासी संस्कृति को कविता के माध्यम से बता रहे हैं :
नारा किसी का काटिए करो ना इसमे भेद-
खुद से काम को खुद करने में नही है कोई दोष-
पाँच दिन गठबंधीन बारह चौका नीर-
नाम करण तेरहवे दिन में हरी कठिन की पीर-
सात साल कि उम्र में जब बालक हो जाये-
कान नाख छेदन करो गोंडी धर्म निभाय...
