आमा ला खा के लोग बचावत रहिन परान गा...आम पर कविता-

कन्हैयालाल पड़ियारी ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से आम के विभिन्न प्रकार के नाम बताते हुवे कविता सुना रहे हैं, वे कह रहे हैं कारखाने के कारण आम के ये प्रकाश ख़त्म हो रहे हैं :
चंद्री आमा, लोढ़ा आमा, घोलघोली आमा, कच्चा साधी कीरी आमा, पतरलुका आमा, असडिया कपूर आमा, केरा आमा, गिकुवारी आमा, तोतापरी, केसनाही आमा, लेसुन आमा, नगरिन गिरहा, पानी आमा, कठर्री आमा-
आऊ आनी-बानी के नाम गा,
आमा ला खा के लोग बचावत रहिन परान गा-
लोगन काटिन डारा पाना करिन सत्यानाश गा...

Posted on: Sep 19, 2018. Tags: AGRICULTURE CG KANAHIYALAL PADIYARI MANGO POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

कुकरानो की कमी नहीं, हर पांच साल आते हैं...व्यंग्य रचना-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक व्यंग्य रचना सुना रहे हैं :
कुकरानो की कमी नही हर पांच साल आते हैं-
हर पांच साल में नए-नए परवाने बनाते हैं-
हरी-हरी बंडल दिखाकर हमारे असमत धन छीन जाते हैं-
भोले भाले समझ नही पाते, उनकी चाल-
फंस जाते हैं देख, हरी-हरी नोटो का बंडल-
वादे कसमे भूलकर करते हैं मनमानी-
हम लोग भोले-भाले उनकी चाल कैसे जानी...

Posted on: Sep 18, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SATIRE SONG VICTIMS REGISTER

ये ऋतुएँ कितनी प्यारी, आहा कितनी न्यारी हैं...बाल कविता-

ग्राम-सिंगपुर, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से कक्षा पांचवी का छात्र ओमकार एक बाल कविता सुना रहा है :
ये ऋतुएँ कितनी प्यारी, आहा कितनी न्यारी हैं-
वर्षा आती पानी लाती, धरती हरी भरी हो जाती-
खुश हो जाते सभी किसान, खेतो में लहराते धन-
पकते धान दिवाली आती, खूब सब्जियां ठण्ड खिलाती-
स्वेटर पहने तापे आग, गाँव-गाँव में होती फाग-
फिर आते गर्मी के दिन, मिले चैन न पानी बिन...

Posted on: Sep 18, 2018. Tags: CG KABIRDHAM OMKAR KUMAR MARKAM PANDARIYA POEM SONG VICTIMS REGISTER

भाजपा हर आईस अउ जनता ला परिसान करिस...कविता-

ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक कविता सुना रहे हैं :
भाजपा हर आईस अउ जनता ला परिसान करिस-
भाजपा कर राज में जल जंगल हर बेचाईस-
अउ बहार से बड़े-बड़े कम्पनी ला बलाईस-
भाजपा कर राज आईस अउ जनता ला परिसान करिस-
अउ विकास कह-कह के नेता चमचा मन हमके ललचाईन-
बोट ला देवाईन अउ ये मन हमके ला घसीट-घसीट के लुटत हैं-
कोट में कचेहरी में हर जगह काकरोच फैसला नइ सुनावत आएं...

Posted on: Sep 17, 2018. Tags: CG KAILASH SINGH POYA POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER

पडोसी ठीक रहे या न रहे साथ तो निभाना ही पड़ता है, समझौता करना ही पड़ता है...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं: पत्नी ने कहा पडोसी कैसा है मैने कहा अच्छा है- जब रात के अँधेरे में कांच के टुकड़े बिखेर देता है दरवाजे के बाहर पत्नी को समझा दिया हूँ- बच्चों को नंगे पैर निकलने नही देना- बूढी माँ पैर पर चप्पल पहनकर निकले- पडोसी के बच्चों से सम्मान स्नेह रखें- पत्नी को समझ दिया हूँ- पत्नी ने पूछा पडोसी कैसा है- मैंने कहा अच्छे हैं- छन्न से कांच के टुकड़े कि आवाज आई मैंने समझ गया पडोसी अच्छा नही है- पडोसी ठीक रहे या न रहे साथ तो निभाना ही पड़ता है- समझौता करना ही पड़ता है: कन्हैयालाल पडियारी@9981622548.

Posted on: Sep 17, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

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