सब्जी में आलू का, जंगल में भालू का बड़ा ही महत्व हैं... कविता-
ग्राम-जामपानी, पोस्ट-लिलासी, तहसील-दुर्भी, जिला-सोनभद्र (उत्तरप्रदेश) से रामदीप भारती एक कविता सुना रहे हैं :
सब्जी में आलू का, जंगल में भालू का बड़ा ही महत्व हैं-
चट्टानों में सैन का, जानवरों में बैल का-
घर के लिए खपरैल का, बड़ा ही महत्व है-
राजनीति में नेता का, फलो में पपीता का-
पुस्तको में कविता का बड़ा ही महत्व है-
तकनीकी में टीवी का, रिश्तों में बीबी का...
Posted on: Sep 22, 2018. Tags: POEM RAMDIP BHARATI SONBHADRA SONG UP VICTIMS REGISTER
जंगल घूमा चाचा जी ने, दूरबीन लिया सांथ में...बाल कविता-
ग्राम पंचायत-असुरा, विकासखण्ड-ओडगी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से सभ्या एक बाल कविता सुना रही हैं :
जंगल घूमा चाचा जी ने, दूरबीन लिया सांथ में- दूर-दूर की चिड़िया दिखती उनको अपने पास में- उंचे पेड़ पर चढ़कर देखा एक तेंदुवा नीचे- तभी अचानक दौड़ा बंदर उसके पीछे...
Posted on: Sep 22, 2018. Tags: CG POEM SABHYA SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
सच्चाई को दीमक चाट गया, झूठा करे यहां राज...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी आज की समसामयिक परिस्थिति पर एक कविता सुना रहे हैं :
सच्चाई को दीमक चाट गया, झूठा करे यहां राज-
झूठों का पोल खुल गया, फिर भी नही आती उनको लाज-
शर्म हया को ताक में रखकर, करते है काम काज-
समाज के आँखों में धूल झोककर, नही जानता अपना समाज-
अपने ही आन बान में जो मस्त हो, उन्हें समाज से क्या लेना देना-
जो दुनिया को ठोकर मारता हो, वही तो लूट लेता है खजाना...
Posted on: Sep 21, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
एक तिल के लिए ही क्यों लड़ बैठे भाई...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
एक तिल के लिए ही क्यों लड़ बैठे भाई-
एक दिल को क्यों हम पटाते नही भाई-
दस दिल हो जाने पर भी हमें परवाह नही-
सौ दिल टूट जाएं तो भी हमें कोई गम नही-
हमारी भूख बढ़ती ही जाती है, भूख कब तक सहें-
हमारा वतन चला जा रहा है, सूखा कब तक सहें...
Posted on: Sep 20, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
आना मेरे गाँव तुम्हे मै दूंगी फूल कन्हेर के...कविता
ग्राम-फुरफुन्दी, विकासखण्ड-कोयलीबेडा, तहसील-पखांजूर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से रेखा ताम्रकार, अनीता साहू, चांदनी साहू और तमन्ना साहू एक कविता सुना रहे हैं :
आना मेरे गाँव तुम्हे मै दूंगी फूल कन्हेर के-
कुछ कच्चे, कुछ पक्के घर हैं, एक पुराना तार है-
सड़क बनेगी सुनती हूँ, इसका नंबर इस साल है-
चढ़ते आना टीले ऊपर, कई पेड़ हैं बेर के-
बाबा ने था पेड़ लगाया, बापू ने फल खाए हैं...
