छोटी सी मछली पानी में बिछली...बाल कविता-
ग्राम-बैजलपुर, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से हरिशंकर रजक एक छोटी से बालिका राधिका से एक बाल कविता सुन रहे हैं :
छोटी सी मछली पानी में बिछली-
पापा ने पकड़ा मम्मी ने पकाया-
मोटा भईया खाया-
मछली जल की रानी हैं, जीवन उसका पानी हैं-
हाथ लगाओ डर जाती है, बाहर निकालो मर जाती है-
आजा राजा राजा मामा लाया बाजा...
Posted on: Sep 24, 2018. Tags: CG CHILDREN HARISHANKAR RAJAK KABIRDHAM POEM SONG VICTIMS REGISTER
बस के नीचे केला, मामाजी का मेला...बाल कविता-
ग्राम-बैजलपुर, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से शंकर रजक कक्षा 3 के छात्र बिसंभर से एक बाल कविता सुना रहे हैं:
बस के नीचे केला, मामाजी का मेला-
मेला देखने जाऊंगा, अंटी को बुलाऊंगा-
ओ मेरा अंटी, बजा मेरा घंटी-
घंटी में कुछ नही मामा जी का मूंछ नही...
Posted on: Sep 24, 2018. Tags: CG CHILDREN KABIRDHAM POEM SANKAR RAJAK SONG VICTIMS REGISTER
छोटे-छोटे कदम हमारे आगे बढ़ते जायेंगे...कविता-
ग्राम पंचायत-असुरा, विकासखण्ड-ओडगी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से स्कूल की छात्रा कविता एक बाल कविता सुना रही हैं :
छोटे-छोटे कदम हमारे आगे बढ़ते जायेंगे- पढ़ना कभी न छोड़ेंगे, हर दम पढ़ने जायेंगे- छोटे-छोटे हांथ हमारे, गड्ढ़े खूब बनायेंगे- इस गड्ढ़े में अच्छे सुन्दर पौधे खूब लगायेंगे...
Posted on: Sep 23, 2018. Tags: CG KAVITA POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
जंगल में एक वृक्ष खड़ा था, सब वृक्षों से बड़ा था...बाल कविता
ग्राम-देवरी, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक बाल कविता सुना रहे हैं :
जंगल में एक वृक्ष खड़ा था, सब वृक्षों से बड़ा था-
लंबा चौड़ा छायादार, उसके नीचे था बाजार-
बंदर बेच रहा था आलू, उसको तोल रहा था भालू-
हिरण लिया सब्जी का ठेला, बेच रहा था हरा केला-
लौकी, कोहड़ा और पपीता लेकर आया बूढा चीता-
खरहा हरी मिर्च ले आये, बंदरिया को लगे उसे चखाए...
Posted on: Sep 23, 2018. Tags: CG CHILDREN KAILASH SINGH POYA POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
दुर्गा माटी ला घलो कभू ना समझय नीत...कविता-
ग्राम-बरभंवा, पंचायत-सरेखा, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से लक्ष्मण श्रीवास के साथ आजमी और यासमीन छत्तीसगढ़ी भाषा में एक कविता सुना रही हैं :
दुर्गा माटी ला घलो कभू ना समझय नीत-
पालन पोषन येही करय, कमल फुलए येही कीत-
टीका बना के धरे, होत ना कोनो संत-
पीकर तो महुरा बरे, चारी चारी चुगली ला समाज-
खजरी खसरा रोग, खाजुवावत दुःख होत है पाछू दुःख ला भोग
जउन गांव जाना नही पूछे के का काम...


