जुग जुग जिये शुललनवा, पवनवा के भाग जागल हो...गीत
मालीघाट, मुज़फ्फर, बिहार से सुनील कुमार एक लोकगीत सुना रहे हैं :
जुग जुग जिये शुललनवा-
पवनवा के भाग जागल हो-
ओ ललना लाला होई हैं-
कुलवा के दीपक मनवा में आश लागल हो-
आज के दिनवा सुहावन रतिहा लुभावन हो-
ललना जितिया के होरिलवा जनमवा-
होरिलवा बड़ा सुंदर हो...
Posted on: Jan 08, 2020. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
बकरी का सुरक्षित बंधिया करण कैसे करायें...
मालीघाट, मुजफ्फरपुर (बिहार) से बकरी पालन समूह और सभी बकरी पालन करने वाले श्रोताओं को कार्यक्रम के माध्यम से बकरी का सुरक्षित बंधिया करण कैसे करायें और किससे कराये बता रहे हैं, इस विषय पर जानकारी के लिये आइये सुनते हैं कार्यक्रम जिसे प्रस्तुत कर रहे हैं सरला श्रीवास और अनीता कुमारी|
जब बकरी बीमार पड़े तो उस समय गांव के पशु सखी से संपर्क करें और सलाह लें...
Posted on: Jan 02, 2020. Tags: BIHAR INFORMATION MUZAFFARPUR SARLA SHRIWAS SONG SUNITA KUMARI VICTIMS REGISTER
ऐसे सच्चे वीर बनो तुम भारत के हो लाल...कविता-
मालीघाट, मुजफ्फरपुर (बिहार) से आदित्य राय ठाकुर एक कविता सुना रहे हैं :
ऐसे सच्चे वीर बनो तुम भारत के हो लाल-
आजादी है अधिकार हमारा यही एक था जिसका नारा-
भारत का जन जन को पाया-
सर चढ़ाकर जिसने भुक्त जन जन का जंजाल-
लोक मानी से बनो वीर तुम भारत माँ के लाल...
Posted on: Jan 02, 2020. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR POEM SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
बकरी को खाने के लिये क्या दें और क्या नहीं दें...
मालीघाट, मुजफ्फरपुर (बिहार) से बकरी पालन समूह और सभी बकरी पालन करने वाले श्रोताओं को कार्यक्रम के माध्यम से बकरी को खाने के लिये क्या देना चाहिये बता रहे हैं, बकरी का पाचन तंत्र और मनुष्य का पाचन तंत्र अलग होता है इसलिये उसे चावल नहीं खिलाना चाहिये, घास, पत्ती, चूरा आदि खिलाना चाहिये इस विषय पर जानकारी के लिये आइये सुनते हैं कार्यक्रम जिसे प्रस्तुत कर रहे हैं सरला श्रीवास और अनीता कुमारी|
जब बकरी बीमार पड़े तो उस समय गांव के पशु सखी से संपर्क करें...
Posted on: Jan 01, 2020. Tags: BIHAR INFORMATION MUZAFFARPUR SARLA SHRIVAS SONG SUNITA KUMARI VICTIMS REGISTER
कैसी है ये आजादी कहां हमारी आजादी...गीत-
मालीघाट, मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक गीत सुना रहे हैं :
कैसी है ये आजादी कहां हमारी आजादी-
विकास बोले ये कैसा विकास घर छूटे और खेत विनाश-
कर दिया हमको बेघर भईया हो गये लाचार-
अधिकार छीन लिया हमसे जल जंगल जमीन हमसे-
लेके रहेंगे हक हमारा जल जंगल जमीन हमारा-
हीराकुण्ड का पानी सारा-
अब नहीं देंगे अब नहीं देंगे होने ये अन्याय...
