मोर छत्तीसगढ़ के भुईयाँ माटी, हवे उपजाऊ गा संगी...छत्तीसगढ़ी किसानी गीत-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी छत्तीसगढ़ी भाषा में एक किसानी गीत सुना रहे हैं :
मोर छत्तीसगढ़ के भुईयाँ माटी, हवे उपजाऊ गा संगी-
सोना कसन धान उपजथे-
छत्तीसगढ़ गढिया अड़बड कमाऊ गा संगी-
नई जाने बेरा कुबेरा डरकत ले कमाथे-
आऊ खाथे चार बेरा, मोठा लुगा धोती पिंथे-
मुड़ मा टुकना बोह के ठुमुक-ठुमुक रेंगथे गा संगी...
Posted on: Sep 27, 2018. Tags: AGRICULTURE CG CHHATTISGARHI FARMING KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
आमा ला खा के लोग बचावत रहिन परान गा...आम पर कविता-
कन्हैयालाल पड़ियारी ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से आम के विभिन्न प्रकार के नाम बताते हुवे कविता सुना रहे हैं, वे कह रहे हैं कारखाने के कारण आम के ये प्रकाश ख़त्म हो रहे हैं :
चंद्री आमा, लोढ़ा आमा, घोलघोली आमा, कच्चा साधी कीरी आमा, पतरलुका आमा, असडिया कपूर आमा, केरा आमा, गिकुवारी आमा, तोतापरी, केसनाही आमा, लेसुन आमा, नगरिन गिरहा, पानी आमा, कठर्री आमा-
आऊ आनी-बानी के नाम गा,
आमा ला खा के लोग बचावत रहिन परान गा-
लोगन काटिन डारा पाना करिन सत्यानाश गा...
Posted on: Sep 19, 2018. Tags: AGRICULTURE CG KANAHIYALAL PADIYARI MANGO POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : पहले के लोग कोदो कुटकी खाकर ज्यादा दिन जीते थे, अब 50 साल भी नहीं जीते है...
ग्राम-जामकुटनी, पंचायत-बेलगाल, तहसील-पखांजूर, जिला कांकेर (छत्तीसगढ़) से सुरजू गोंडी में बता रहे है उनके क्षेत्र में पहले के लोग कोदो (कोहला) मड़या का इस्तेमाल करते थे तो ज्यादा बीमार नहीं पड़ते थे| पहले के लोग 75 साल तक जीते थे लेकिन अभी ऐसा नही है| अभी के लोग तो 50 साल में ही खत्म हो जाते हैं अभी के हर फसल में दवा का इस्तेमाल करते है| दवा वाले को खाने से अभी के लोग बहुत ज्यादा बीमार पड़ते है. पहले के लोग जंगलो में जाकर जंगल से मशरुम, बांस,भाजी आदि सब्जियों को ज्यादातर खाते थे|और उसी के अभी के आदिवासी जो है अपनी बोली भाषा को धीरे-धीरे भूल रहे है क्योंकि अभी थोडा बहुत पढ लिख लेते है तो जैसे 12 वी या कोलेज तो हिंदी, अंग्रेजी ज्यादा बोलने लगते हैं और देवी-देवताओ को भूल जाते है |
Posted on: Sep 11, 2018. Tags: AGRICULTURE AMAR MARAVI CG PAKHANJUR KANKER VANANCHAL SWARA
किसान स्वर : अधिक फसल के लिए रासायनिक खाद का उपयोग करते है, पर स्वास्थ्य के लिए बुरा...
ग्राम-मरोड़ा, तहसील-पखांजुर, ब्लाक-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर, (छत्तीसगढ़) से विष्णु राम बता रहे है कि उनके क्षेत्र में सबसे ज्यादा खेती धान और मक्का का किया जाता है जिसमे रासायनिक खाद का उपयोग किया जाता है जो पैदावार बढ़ाती है लेकिन उससे नुक्सान होता है, जैविक खाद से उगाया हुआ अनाज स्वादिष्ट और ताकतवर होता है | पूर्वज लोग बिना रासायनिक खाद के ही फसल उगाते थे और लम्बे समय तक जीवित रहते थे, लेकिन आज रासायनिक खाद का उपयोग करके उगाया हुआ फसल में स्वाद नही होता है और उसमे पौष्टिक आहार भी नही होता है, इसलिए सबसे ज्यादा गोबर खाद का उपयोग करना चाहिए पर अधिक फसल के लिए हम लोग रासायनिक खाद का उपयोग कर रहे हैं
Posted on: Sep 09, 2018. Tags: AGRICULTURE AMAR MARAVI CG KANKER KISAN SWARA KOELIBEDA SONG VICTIMS REGISTER
किसान स्वर: सरकारी खाद से स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहता है पर हम अभी उसका ही उपयोग करते हैं...
ग्राम-पालनदी, पंचायत-जनकपुर, तहसील-पखांजूर, ब्लाक-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से अमर मरावी के साथ में संतराम गावड़े, देवदास गावड़े और सुनीता गावडे बता रहे है कि उनके गाँव में धान की उपज अधिक होती है, वे सरकारी खाद का प्रयोग कर धान की खेती करते हैं, खेती के लिए पहले जुताई करते हैं, उसके बाद रोपाई का काम किया जाता है और खाद डालते हैं, पहले किसान गोबर खाद का प्रयोग खेती में करते थे, लेकिन उर्वरक शक्ति कम होने के कारण अब सरकारी रासायनिक खाद का उपयोग करने लगे हैं, पहले लोग गोबर खाद के प्रयोग से प्राप्त उपज का उपयोग करते थे, जो लोगो के स्वास्थ्य के लिए अच्छा था, लेकिन अभी रासायनिक खाद का प्रयोग करते हैं, जिसका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है |
