टूटे हुये बर्तन को बनाया तूने प्रभू...गीत-
ग्राम पंचायत-मुलाकिसोली, तहसील-कोंटा, जिला-सुकमा (छत्तीसगढ़) से मडकाम बालकृष्णा एक गीत सुना रहे हैं :
टूटे हुये बर्तन को बनाया तूने प्रभू-
जल जल के किचन से उबाला तूने प्रभू-
हाले लुईया, हाले लुईया, हाले लुईया-
टूटे हुये बर्तन को बनाया तूने प्रभू...
Posted on: Jan 23, 2020. Tags: CG KONTA MADAKAM BALKRISHNA SONG SUKAMA VICTIMS REGISTER
आराधना हो आराधना खुदावन यीसू की आराधना...गीत-
ग्राम पंचायत-इंजरम, तहसील-कोंटा, जिला-सुकमा (छत्तीसगढ़) से पंडा रुकमणी एक गीत सुना रही हैं :
आराधना हो आराधना खुदावन यीसू की आराधना-
शांति दाता की आराधना-
मुक्ति दाता की आराधना-
पवित्र मन से आराधना-
सेवी मन से आराधना-
आराधना हो आराधना खुदावन यीसू की आराधना...
Posted on: Jan 23, 2020. Tags: CG KONTA PANDA RUKAMANI SONG SUKAMA VICTIMS REGISTER
जौ फसल के उपयोग और लाभ...
जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से जगदीश जौ फसल के उपयोग और लाभ के बारे में बता रहे हैं, जौ को बेर्रा के नाम से भी जाना जाता है, ये एक परंपरागत अनाज हैं, इसका अनाज रक्तचाप नियंत्रित करने में उपयोगी है, नियमित सेवन करने स्वास्थ्य संबंधी समस्या में लाभ मिलता है, पाचनतंत्र को ठीक रखने में उपयोगी है, वजन घटाने के लिये इसका सेवन किया जा सकता है, आयरन की कमी को दूर करता है, इसका सेवन कर लाभ ले सकते हैं अधिक जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं : संपर्क नंबर@7697448583.
Posted on: Jan 23, 2020. Tags: HEALTH JAGDISH YADAV MP REWA SONG VICTIMS REGISTER
स्वास्थ्य स्वर : स्वाइन फ्लू का घरेलू उपचार-
प्रयाग विहार, मोतीनगर, रायपुर (छत्तीसगढ़) से वैद्य एच डी गांधी स्वाइन फ्लू का घरेलू उपचार बता रहे हैं, महाशुदर्शन का काढ़ा दो चम्मच 1 गिलास पानी में डालकर पकायें और जब एक कप बच जाये तो उसे छानकर सुबह शाम सेवन करें लाभ हो सकता है, दूसरा गिलोय का पाउडर दिन में दो बार भोजन के बाद सेवन करें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, भोजन में मिर्च, मसाला, तेल, खटाई का सेवन कम करें नशा न करें, मैदा शक्कर नमक का प्रयोग कम करें, अधिक जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं: संपर्क नंबर@9111061399.
Posted on: Jan 23, 2020. Tags: CG HD GANDHI HEALTH RAIPUR SONG VICTIMS REGISTER
गुरु शंकराचार्य शास्त्रार्ध में कैसे हारे...
भारती के पति मंडन मिश्र मिथिलांचल में कोसी नदी के किनारे स्थित एक गांव महिषि में रहते थे। तब धर्म-दर्शन के क्षेत्र में शंकराचार्य की ख्याति दूर-दूर तक थी। कहा जाता है कि उस वक्त ऐसा कोई ज्ञानी नहीं था, जो शंकराचार्य से धर्म और दर्शन पर शास्त्रार्थ कर सके। शंकराचार्य देशभर के साधु-संतों और विद्वानों से शास्त्रार्थ करते मंडन मिश्र के गांव तक पहुंचे थे। यहां 42 दिनों तक लगातार हुए शास्त्रार्थ में शंकराचार्य ने हालांकि मंडन को पराजित कर तो दिया, पर उनकी पत्नी के एक सवाल का जवाब नहीं दे पाए और अपनी हार मान ली थी. शास्त्रार्थ की निर्णायक थीं भारती
मंडन मिश्र गृहस्थ आश्रम में रहने वाले विद्वान थे। उनकी पत्नी भी विदुषी थीं। इस दंपती के घर पहुंचकर शंकराचार्य ने मंडन मिश्र से शास्त्रार्थ करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने शर्त रखी कि जो हारेगा, वह जीतने वाले का शिष्य बन जाएगा। अब सवाल खड़ा हुआ कि दो विद्वानों के बीच शास्त्रार्थ में हार-जीत का फैसला कौन करेगा। शंकराचार्य को पता था कि मंडन मिश्र की पत्नी भारती विद्वान हैं। उन्होंने उन्हें ही निर्णायक की 21 दिनों में हार गए मंडन, फिर पत्नी ने दी शास्त्रार्थ की चुनौती
शंकराचार्य के कहे अनुसार भारती दोनों के बीच होने वाले शास्त्रार्थ का निर्णायक बन गईं। मंडन और शंकराचार्य के बीच 21 दिनों तक शास्त्रार्थ होता रहा। आखिर में शंकराचार्य के एक सवाल का जवाब नहीं दे पाए और उन्हें हारना पड़ा।
