हमर बेरिया हो...गीत-
मालीघाट, मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार भिखारी ठाकुर जी की रचना “दोरंग नीतिया” सुना रहे हैं:
येही कोख बेजा जनमल वही कोख बेटिया हो-
दुरंग नीतिया-
काहे कैला हो बाबू जी दुरंग नीतिया-
बेटा जे जनमला से तोहरा बधईया-
हमर बेलिया-
बेटा की खेलय खातिर देला मोटर गाड़िया हो-
हमर बेरिया काहे झुला तू लागुरिया...
Posted on: Jan 31, 2020. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
दया कर दान दे दाता, हमें परमात्मा देना...गीत-
प्रसार केंद्र, मालीघाटी, मुज़फ़्फ़रपुर (बिहार) से सुनिल कुमार एक प्रार्थना गीत सुना रहे हैं :
दया कर दान दे दाता, हमें परमात्मा देना-
दया करना हमारी आत्मा में शुद्धता देना-
हमारे ध्यान में आओ प्रभु आँखों में बस जाओ-
अँधेरे दिल में आकर के रंग ज्योति जगा देना-
बहा दो प्रेम की गंगा, दिलों में प्रेम का सागर-
हमें आपस में मिलजुलकर, प्रभु रहना सिखा देना...
Posted on: Jan 30, 2020. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
गाँव में पानी की समस्या है हैण्डपंप लगवाने में मदद करें...
ग्राम-खैराहा, पंचायत-कोटा, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से बसंत कुमार आदिवासी बता रहे हैं उनके पारा में पानी की समस्या है वे दूर से साईकिल से पानी लाते हैं, जिससे कारण उन्हें समस्या होती है, लोग परेशान है इसलिये वे सभी सीजीनेट श्रोताओं से अपील कर रहे हैं कि दिये नंबरों पर बात कर पारा में हैण्डपंप लगवाने में मदद करें : PHE ठेकेदार@7047603066, संपर्क नंबर@8349223867.
Posted on: Jan 29, 2020. Tags: BASANT KUMAR ADIVASI MP PROBLEM REWA SONG VICTIMS REGISTER
आजादी मिली किसको समझने की बात है...कव्वाली-
मालीघाट, मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक कव्वाली सुना रहे हैं:
अंग्रेज वतन से गये खुशी की बात है-
आजादी मिली किसको समझने की बात है-
मालिक वतन का भूखा जाता है आज भी-
चेहरे से उसके खाई गिराता है आज भी-
बेघर है महीन है वो खाली हाथ है-
आजादी मिली किसको समझने की बात है...
Posted on: Jan 29, 2020. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
लहराती झाकियां मुस्कुराकर गणतंत्र की कहानिया सुनाती है...रचना-
मालीघाट मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार डॉ ऊषा अनुराग की एक रचना सुना रहे हैं:
लहराती झाकियां मुस्कुराकर गणतंत्र की कहानिया सुनाती है-
आजादी की घटनाये रंगों में एक एक करके उभरी है-
इन पक्के रंगों को चाहकर भी मिटा नहीं सकते-
चुनौती भरा समय है नींद से जगाना है-
इन मुट्ठीभर लोगो को कडियाँ जोड़कर पढाना है-
एकता का पाठ संस्कृति का मूल मंत्र है...
